Winter Gaddiasthan of Makku Math Baba Tungnath ji

baba tunganath (गद्दीस्थल मक्कू मठ)

हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड देवभूमि के मक्कू मठ जो रुद्रप्रयाग जिले के उखीमठ तहसील के अंतर्गत आता है जहाँ पंच केदारों में शामिल तृतीय केदार तुंगनाथ महादेव जी Baba Tungnath का शीतकालीन गद्दी स्थल है|

जब तुंगनाथ के कपाट  बंद हो जाते हैं तो उस दौरान बाबा की चल विग्रह डोली इसी स्थान पर आ जाती है और छह महीने  यहीं पर पूजा अर्चना की जाती है| मंदिर रोड से करीब पैदल लगभग 100 मी की दुरी पर है| जिससे श्रद्धालु को बाबा के दर्शन करने में कोई परेशानी नही होती |

मान्यता है कि आदि गुरु शंकराचार्य ने उत्तराखंड यात्रा के दौरान इस मंदिर को बनाया था। शीतकाल के छह माह बाबा तुंगनाथ Baba Tungnath की पूजा  मक्कूमठ के मार्कण्डेय मंदिर।में होती है।

उस दोरान शिव भक्तों भोले बाबा की पूजा अर्चना  इसी स्थान पर करते है| |शास्त्रों में उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम का बड़ा ही महात्म्य बताया गया है।

लेकिन उत्तराखंड में ऐसे एक नहीं बल्कि चार और केदार हैं| जिनका धार्मिक महत्व केदारनाथ के बराबर बतया गया है। Baba Tungnath जी का पंच केदार का वर्णन स्कंद पुराण के केदारखंड में स्पष्ट रूप से वर्णित है।

पंच केदार में प्रथम केदार भगवान केदारनाथ हैं, जिन्हें बारहवें ज्योर्तिलिंग के रूप में भी जाना जाता है। द्वितीय केदार मद्महेश्वर हैं। तृतीय केदार तुंगनाथ, चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ और पंचम केदार कल्पेश्वर हैं।

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                                                              फोटो- प्रेम बल्लभ गोड़   
                                           बाबा तुंगनाथ की चल विग्रह डोली 

Baba Tungnath जी का शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ के मंदिर के गर्भगृह में मुख्य शिवलिंग ताम्रनाग से ढंका हुआ है. इस पर ऊपर रखे कलश से जलाभिषेक होता रहता है. यहाँ पर शिवलिंगों की पूजा मर्कटेश्वर के नाम से की जाती है

इस पवित्र स्थान का वर्णन इस्कंद पुराण के केदार खंड में भी किया गया है |यहाँ पर भगवान शिब की  पिंडी रूप में  पूजा होती है| शिब की 11वे रुद्र के नाम से भी जाना जाता है, ये भी कहा जाता है इसी स्थान पर मिर्कुंडऋषि ने भी भगवान शिब की तपस्या की थी,

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                                                                                                                फोटो- प्रेम बल्लभ गोड़   

तुंगनाथ Baba Tungnath के कपाट खुलने पर |बाबा तुंगनाथ जी की चल विग्रह डोली इसी स्थान से तुंगनाथ के लिए जाती है जो तुंगनाथ में 3 दिन में पहुंचती है

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पूरे रास्ते में श्रद्धालु बाबा की डोली के दर्शन करते हुए बाबा के साथ पूरे गांव व आस पास वाले बाबा की डोली के साथ चलते हैं|उस दोरान यहाँ पर पूरा माहोल शिब के जयकारों भाग्तिमय हो जाता है|अप्रेल से मेई महीनों में यहाँ की सुन्दरता और भी बड जाती है जब चारों और रंग बिरंगे फूल खिलते हैं|

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तुंगनाथ मंदिर Baba Tungnath

तुंगनाथ मंदिर जो  तुंगनाथ पर्वत पर  3460 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है| ये मंदिर पंच केदारों में सबसे ऊँचाई पर स्थित है। तुंगनाथ मंदिर में शिब के बाहु और हिर्दय की लिंग रूप में पूजा की जाती है| तुंगनाथ मंदिर के दर्शन करने के  लिए सड़क से लगभग 3 कि मी  पैदल चलना पड़ता है|

मंदिर के पुजारी- इस मंदिर के पुरोहित और पुजारी मैठाणी लोग होते हैं। जो मक्कू मठ के ही निवासी हैं

Baba Tungnath मक्कू मठ कैसे पहुंचे–

रेलवे स्टेशन:   नजदीकी रेलवे स्टेशन हरिद्वार है| वहां से बस सेवा उपलब्ध है आप प्राइवेट कार या जीप से भी आ सकते हैं|

एयरपोर्ट :    नजदीकी एयरपोर्ट देहरादून जॉली ग्रांट है|

रुद्रप्रयाग से केदारनाथ रोड़ से भीरी लगभग 28 km और  भीरी परकण्डी से यहाँ  16km होते हुए पहुंचे, उखीमठ से भी होकर यहाँ पहुंचा जा सकता है|ऊखीमठ के रास्ते यह दूरी लगभग  32 किमी है| और यहीं से आप बद्रीनाथ जा सकते है| रुद्रप्रयाग से यहाँ के लिए बस सेवा के अलावा टैक्सी और जीप भी बुक कराई जा सकती है।
रहने के लिए 
यहां पर श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए धर्मशालाएं प्राइवेट होटल और खाने के लिए उचित व्यवस्था है |

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