करवाचौथ 2020 शुभ संयोग,पूजन विध और पूजा का सही समय

करवाचौथ 2020  (Karva Chauth)

करवाचौथ 2020 का व्रत कार्तिक हिन्दु माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दौरान किया जाता है जिसका अनुसरण गुजरात, महाराष्ट्र, और दक्षिणी भारत में किया जाता है,
करवा चौथ का दिन और संकष्टी चतुर्थी, जो कि भगवान गणेश के लिए उपवास करने का दिन होता है, एक ही समय होते हैं। विवाहित महिलाएँ पति की दीर्घ आयु के लिए करवा चौथ का व्रत को रख ती हैं।

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विवाहित महिलाएँ भगवान शिव,माता पार्वती और कार्तिकेय के साथ-साथ भगवान गणेश की पूजा करती हैं और अपने व्रत को चन्द्रमा के दर्शन और उनको अर्घ अर्पण करने के बाद ही तोड़ती हैं। करवा चौथ का व्रत रखना बहुत कठिन होता है और इस दिन अन्न और जल लिए बिना ही सूर्योदय होने से पहले और  रात में चन्द्रमा के आने तक किया जाता है।

करवाचौथ 2020 को करक चतुर्थी भी कहते हैं  करवा ऐक  मिट्टीका  पात्र होता है  जिस से चन्द्रमा को जल अर्पण, जो कि अर्घ कहलाता है, किया जाता है। पूजा के दौरान करवा बहुत महत्वपूर्ण होता है और इसे ब्राह्मण या किसी योग्य महिला को दान में भी दिया जाता है।
करवा चौथ दक्षिण भारत की तुलना में उत्तरी भारत में ज्यादा प्रसिद्ध है। करवा चौथ के चार दिन बाद पुत्रों की दीर्घ आयु और समृद्धि के लिए अहोई अष्टमी व्रत किया जाता है,
Karva Chauth का त्‍योहार दीपावली से नौ दिन पहले और  शरद नवरात्र  के बाद मनाया जाता है. जो  कार्तिक मास की चतुर्थी को आता है. अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से यह त्‍योहार इस बार करवा चौथ 4 नवंबर 2020 बुधवार को आ रहा है|

करवाचौथ 2020 की तिथि (Karva Chauth Date and Time)

करवा चौथ 4 नवंबर 2020 बुधवार

करवा चौथ पूजा मुहूर्त- 17:29 से 18:40

चंद्रोदय- 20:16

चतुर्थी तिथि आरंभ- 03:24 (4 नवंबर)

चतुर्थी तिथि समाप्त- 05:14 (5 नवंबर)

करवाचौथ 2020 त्‍योहार कैसे मनाते हैं-
करवा चौथ आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच यह पर्व दरकते रिश्तों को  फिर से सहेजने का मौका देता है।
करवा चौथ एक ऐसा व्रत है , जिसका इंतजार लगभग सभी शादी शुदा महिलाओं को होता है, इस दिन सुहागिनें अपने पति की दीर्घायु लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं,  सुहागिन महिलाएं करवा चौथ की तैयारियां कई दिन पहले से शुरू करने में लग जाती है|

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करवा चौथ वाले दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी खाती हैं| सरगी से ही कौरवा चौथ के व्रत का प्रारंभ माना गया है।जिसमें हर सास अपनी बहू को सरगी देती है और व्रत पूर्ण होने का आशीर्वाद देती है। सरगी सुबह जल्दी उठ के सूर्य निकलने से पहले खाया जाता है. इसमें नट्स, सेवईं की खीर और मठरी होती है. सूरज निकलने से पहले यह सब अच्छे से खाकर, खूब सारा पानी पीया जाता है,क्योंकि इसके बाद चांद निकलने तक कुछ नहीं खाया जा सकता है

करवाचौथ 2020 व्रत की पूजा विधि- 
सुबह सरगी के रूप में मिला हुआ भोजन करें पानी पीएं और भगवान की पूजा करके निर्जला व्रत का संकल्प लें,पूजा के लिए शाम के समय एक मिट्टी की वेदी पर सभी देवताओं की स्थापना कर इसमें करवे रखें, दीवार पर गेरू से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा चित्रित करें। इसे वर कहते हैं।

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चित्रित करने की कला को करवा धरना कहा जाता है।पीली मिट्टी से गौरी बनाएं और उनकी गोद में गणेशजी बनाकर बिठाएं।गौरी को लकड़ी के आसन पर बिठाएं। चौक बनाकर आसन को उस पर रखें। गौरी को चुनरी ओढ़ाएं। बिंदी आदि सुहाग सामग्री से गौरी का श्रृंगार करें।जल से भरा हुआ लोटा रखें।रोली से करवा पर स्वस्तिक बनाएं।और  गौरी-गणेश और चित्रित करवा की परंपरानुसार पूजा करें।
ऊँ अमृतांदाय विदमहे कलारूपाय धीमहि तत्रो सोम: प्रचोदयात’ 

इस मंत्र को करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है

पति की दीर्घायु की कामना करें।करवा पर 13 बिंदी रखें और गेहूं या चावल के 13 दाने हाथ में लेकर करवा चौथ की कथा कहें या सुनें।कथा सुनने के बाद करवा पर हाथ घुमाकर अपनी सासुजी के पैर छूकर आशीर्वाद लें और करवा उन्हें दे दें।तेरह दाने गेहूं के और पानी का लोटा या टोंटीदार करवा अलग रख लें। रात्रि में चन्द्रमा निकलने के बाद छलनी की ओट से उसे देखें और चन्द्रमा को अर्घ्य दें।
इसके बाद पति से आशीर्वाद लें  उन्हें भोजन कराएं और स्वयं भी भोजन कर लें।

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आचार्य पंकज पुरोहित

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