छठ पूजा व खरना महामुहूर्त पोराणिक कथा | chhath pooja

छठ पूजा 

छठ पूजा एकमात्र ऐसा त्योहार है, जिसमें प्रकृति की डूबते हुए सूरज की पूजा अर्चना बड़ी निष्ठा और श्रदा के साथ पूजा की जाती है। सूर्योपासना का यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। कहा जाता है । छठ पर्व बिहार मे बड़े धुम धाम से मनाया जाता है।यह पर्व यहाँ का सबसे बड़ा पर्व है ये उनकी संस्कृति है, ये एक मात्र ही बिहार या पूरे भारत का ऐसा पर्व है जो वैदिक काल से चला आ रहा है

छठ पूजा यह पर्व यहाँ की वैदिक आर्य संस्कृति कि एक छोटी सी सुंदर झलक दिखाता हैं। मुख्य रुप से ॠषियो द्वारा लिखी गई ऋग्वेद मे सूर्य पूजन, उषा पूजन के अनुसार छठ पर्व मनाया जाता हैं।

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पटना के छठ पूजा के दोरंन  घाटों पर मेले जैसा माहौल बन जाता है छठ पूजा के दोरान  बिहार के गंगातट पर बिल्कुल मेले-सा नजारा देखने को मिलता  है। रातभर लोगों के गंगातट पर रुकने की व्यवस्था की जाती है। दूर-दूर से लोग यहां छठ की पूजा करने आते  हैं। छठ के गीतों से गंगा तट पर बने छठ के घाट गुंजायमान रहता है । पूरा शहर छठमय नजर आता है। व्रती के साथ पूरा परिवार छठ घाट पर चार दिनों तक साथ रहते हैं। भक्तिभाव का एेसा संगम देखने को मिलता है।

नहाय-खाय के बाद खरना 

छठ पूजा के पहले दिन दिन कद्दू-भात के प्रसाद का महत्व होता है। वहीं पर्व के दूसरे दिन व्रती सुबह से निर्जला उपवास करेंगी। दिनभर घर या नदी किनारे व्रती गंगाजल से साफ-सफाई करेंगी। शाम में मिट्टी के चूल्हे में आम की लकड़ी जलाकर पीतल या मिट्टी के बरतन में गुड़, चावल और दूध से खीर बनाएंगी। फिर गंगाजल से धुले गेहूं को पिसवाकर रखे आंटे से पूड़ी या रोटी बनाएंगी। शाम होते ही छठी मईया की पूजा कर प्रसाद ग्रहण करेंगी। तत्पश्चात घर के बाकी लोग प्रसाद ग्रहण करेंगे।
व्रती अपने परिवार के साथ बाजार में पूजन सामग्री की खरीदारी करते नजर आते हैं।
आचार्य पंकज पुरोहित जी ने कहा कि सौम्य एवं स्थिर योग में चार दिवसीय अनुष्ठान संपन्न होता है।
विभिन्न पूजा समितियों की ओर से बेहतर पंडाल बनाए जाते हैं वही घाट से लेकर सड़कों तक गूंज रहे छठी मइया के गीत शहर को छठमय बना होता हैं

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छठ पूजा महापर्व की पोराणिक कथा poraanik katha
पुराणों में बताया गया है कि सूर्य षष्ठी का व्रत आरोग्यता, सौभाग्य व संतान के लिए एवं सम्पूर्ण विश्व के कल्याण के लिए किया जाता है।
स्कंद पुराण के अनुसार राजा प्रियव्रत ने भी यह व्रत किया था। राजा प्रियव्रत अनेक साररिक कुष्ठरोगों से प्रभावित थे। भगवान सूर्य को प्रसन्न करने के लिए छठमहापर्व का व्रत किया था।भगवान सूर्य की मानस बहन हैं षष्ठी देवी
भगवान सूर्य की मानस बहन षष्ठी देवी हैं।

षष्ठी देवी को देवसेना भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष देवता भगवान भास्कर को सप्तमी तिथि अत्यंत प्रिय है। विष्णु पुराण के अनुसार तिथियों के बंटवारे के समय सूर्य को सप्तमी तिथि प्रदान की गई। ऐसे में उन्हें सप्तमी का स्वामी कहा जाता है। छठ महापर्व खास तौर पर शरीर, मन तथा आत्मा की शुद्धि का महापर्व है।

खरना पूजा व छठ पूजा महामुहूर्त kharana va chhath pooja mahaamuhoort

नहाय खाय 18 नवम्बर 2020
सूर्योदय 06:45 ए एम पर
सूर्योस्त 05:29 पी एम पर
लोहंडा और खरना- 19 नवम्बर 2020
सूर्योदय 06:45 ए एम पर
सूर्योस्त 05:29 पी एम प

छठ पूजा 20 नवंबर 2020

छठ पूजा के दिन सूर्योदय – 06:48

छठ पूजा के दिन सूर्यास्त – 17:28

षष्ठी तिथि आरंभ – 21:58 (19 नवंबर 2020)

षष्ठी तिथि समाप्त – 21:29 (20 नवंबर 2020)

उषा अर्घ्य, पारण का दिन – 21नवम्बर 2020
सूर्योदय 06:47 ए एम पर
सूर्योस्त 05:28 पी एम पर

छठ पूजा व्रत में इन चीजों की है महत्ता

सूप, डाला – अर्घ्य में नए बांस से बने सूप व डाला का प्रयोग किया जाता है। सूप को वंश की वृद्धि और वंश की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।

ईख – ईख को आरोग्यता का प्रतीक माना जाता है। लीवर के लिए ईख का रस काफी फायदेमंद माना जाता है।

ठेकुआ – आटे और गुड़ से बना ठेकुआ समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

ऋतुफल – छठ पूजा में ऋतुफल का विशेष महत्व है। व्रती मानते हैं कि सूर्यदेव को फल अर्पित करने से विशिष्ट फल की प्राप्ति होती है।

पष्ठी तिथि को शाम को सूर्यदेव की पूजा के लिए गंगा-यमुना के विभिन्न घाटों पर हजारों श्रद्धालु एकत्र होंगे। पर्व को लेकर घरों में खासा उत्साह है। महिलाएं छठ मइया के पारंपरिक गीतों को गाते हुए प्रसाद के लिए गेहूं को धोने, पिसाने की तैयारियों में जुट जाती हैं।
आप सभी महानुभावों को लाइव फाइटर ऑफ इंडिया की ओर से छठमहापर्व की बहुत-बहुत शुभकामनाएं                                                                                                              आचार्य पंकज पुरोहित