दिवाली 2020 में लक्ष्मी पूजन का समय एवं पौराणिक कथा

दिवाली Diwali

दिवाली भारत के सबसे बड़े और सर्वाधिक महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। भारत में हिन्दू धर्म के लोगो के लिए सबसेबड़ा त्यौहार दीपावली का माना जाता है| दीपावली दीपों को प्रज्वलित कर रोशनी करने का त्यौहार है

घरों को मिट्टी के दीपकों की पंक्तियों से प्रकाशित की जाती हैं और घरों को रंगों व मोमबत्तियों से सजाया जाता है। यह त्‍यौहार नए वस्‍त्रों, दर्शनीय आतिशबाजी और परिवार व मित्रों के साथ विभिन्‍न प्रकार की मिठाइयों के साथ मनाया जाता है। चूंकि यह प्रकाश व आतिशबाजी, खुशी व आनन्‍दोत्‍सव दैव शक्तियों की बुराई पर विजय की सूचक है।
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यह सकारात्मक उर्जा वाली रोशनी  नकारात्मक उर्जा वाले अंधकार को दूर करने वाली है | दीपवाली की रात्रि सबसे ज्यादा रोशन होती है | हर घर दुकान में उजाला अपने चरम पर होता है | हो भी क्यों ना | यह दिन त्योहारों का राजा जो है
लक्ष्मी पूजा का समय Lakshmi Puja Time

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दिवाली 14 नवंबर, 2020,शनिवार

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त्त –

17:30:04 से 19:25:54 तकअवधि :1 घंटे 55 मिनट

प्रदोष काल :17:27:41 से 20:06:58 तक

वृषभ काल :17:30:04 से 19:25:54 तक
दिवाली महानिशीथ काल मुहूर्त
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त्त :23:39:20 से 24:32:26 तकअवधि :0 घंटे 53 मिनट

महानिशीथ काल :23:39:20 से 24:32:26 तक

सिंह काल :24:01:35 से 26:19:15 तक
दिवाली शुभ चौघड़िया मुहूर्त
अपराह्न मुहूर्त्त लाभ, अमृत :14:20:25 से 16:07:08 तक

सायंकाल मुहूर्त्त  लाभ :17:27:41 से 19:07:14 तक

रात्रि मुहूर्त्त  शुभ, अमृत, चल :20:46:47 से 25:45:26 तक

उषाकाल मुहूर्त्त  लाभ :29:04:32 से 30:44:04 तक

दीपावली का पौराणिक महत्व और कथा Mythology of diwali

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दिवाली क्यों मनाते है
दिवाली के साथ कई रोचक और महिमापूर्ण पौराणिक  घटनाये जुडी हुई है |
वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे श्री राम
राम का अयोध्या लौटना
दीपावली पर दीप जलाने की परम्परा शायद अयोध्या के लोगो ने ही की थी | इसी रात्रि को श्री राम लक्ष्मण और माता सीता अयोध्या वनवास काट कर आये थे | प्रजा ने उन सभी का स्वागत घी के दीपक जला कर किया था | तब से दीपावली पर दीपक जलाने की प्रथा शुरू हुई |
माँ लक्ष्मी और धन्वंतरि का अवतरण
देवताओ और असुरो के बीच जब समुन्द्र मंथन हुआ तब उसमे से दिवाली के दिन ही विष्णु प्रिया लक्ष्मी और ओषधी के देवता धन्वंतरि प्रकट हुए थे |

समुन्द्र मंथन लक्ष्मी

कृष्ण ने किया नरकासुर का वध

द्वापर युग में विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने दीपावली के दिन ही अत्याचारी राजा नरकासुर का वध किया था | लोगो ने प्रसन्नता और उल्लास के लिए घी के दीप जलाये थे |
नरसिंह अवतरण
पौराणिक मान्यताओ के अनुसार दीपावली के दिन का महत्व इसलिए भी है की इसी दिन भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए विष्णु ने भगवान नरसिंह जी का अवतार लिया था |
स्वामी रामतीर्थ जन्म और समाधी
ब्राह्मण जाति के स्वामी रामतीर्थ का दिवाली के दिन ही जन्म हुआ था | यह बहुत बड़े ज्ञानी थे |
महर्षि दयानन्द
आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द ने दीपावली के दिन ही अजमेर के निकट अवसान लिया  था |
स्वर्ण मन्दिर का शिलान्यास
सिख संप्रदाय के लिए भी दिवाली बहुत महत्व रखती है | दीपावली के दिन ही 1577 ई. में स्वर्ण मन्दिर का शिलान्यास हुआ था।
आप सभी को ‘लाइव कल्चर ऑफ इंडिया’ की और से दीपावली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं

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