चैत्र नवरात्रि मां दुर्गा की कालरात्रि स्वरूप पूजाअर्चना

मां दुर्गा की पूजा-अर्चना 

चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित होता है। आज चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन है यानी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि। आज के दिन मां कालरात्रि की पूजा करने से व्यक्ति को शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस कारण से मां कालरात्रि को शुभंकरी के नाम से भी पुकारा जाता है। मां कालरात्रि की पूजा करने से आकस्मिक संकटों महामारी से रक्षा होती है।( हमारे ऋषि मुनियों की भविष्यवाणी )

भूपाव हो महारोगो मध्य स्यार्धवृष्ट य। दुखिनो जंत्व सर्वे वत्स रे परी धाविनी।।
अर्थात परी धावी नामक संवत्सर में राजाओं में परस्पर युद्ध होगा और महामारी फैलेगी बारिश असामान्य होगी व सभी प्राणी दुखी होंगे। इस महामारी का प्रारम्भ 2019 के अंत में पड़ने वाले सूर्यग्रहण से होगा बृहत संहिता में वर्णन आया है
शनिश्चर भूमिप्तो स्कृद रोगे प्रीपिडिते जनाः

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अर्थात जिस वर्ष के राजा शनि होते है उस वर्ष में महामारी फैलती है । विशिष्ट संहिता में वर्णन प्राप्त हुआ कि जिस दिन इस रोग का प्रारम्भ होगा उस दिन पूर्वा भाद्र नक्षत्र होगा यह सत्य है कि 26 दिसंबर 2019 को पूर्वाभाद्र नक्षत्र था उसी दिन से महामारी का प्रारंभ हो गया था जिसका की पूर्व दिशा से फैलने का संकेत नारद संहिता में दे रखा था

आज के दिन मां कालरात्रि को रातरानी का पुष्प अर्पित करने से वह जल्द प्रसन्न होती हैं। आइए जानते हैं नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा विधि, मंत्र, पूजा मुहूर्त और महत्व क्या है?
मां दुर्गा कालरात्रि पूजा मुहूर्त 
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि यानी चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन 31 मार्च दिन मंगलवार को प्रात:काल 03 बजकर 14 मिनट से प्रारंभ हो गया है, जो 01 अप्रैल दिन बुधवार को प्रात:काल 03 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। ऐसे में आज आपको सुबह तक मां कालरात्रि की पूजा कर लेनी चाहिए।
प्रार्थना
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा।
वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
स्तुति
या देवी सर्वभू‍तेषु मां कालरात्रि रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मंत्र mantra
1.ऊं देवी कालरात्र्यै नमः।
2. ज्वाला कराल अति उग्रम शेषा सुर सूदनम।
त्रिशूलम पातु नो भीते भद्रकाली नमोस्तुते।।
मां कालरात्रि बीज मंत्र
ऊं क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:।
कौन हैं मां कालरात्रि
मां कालरात्रि देवी मां दुर्गा के 9 स्वरूपों में से एक हैं। मां कालरात्रि का रंग कृष्ण वर्ण का है, काले रंग के कारण उनको कालरात्रि कहा गया है। गर्दभ पर सवार रहने वाली मां कालरात्रि के केश खुले रहते हैं। चार भुजाओं वाली मां कालरात्रि दोनों बाएं हाथों में क्रमश:  कटार और लोहे का कांटा धारण करती हैं।

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वहीं दो बाएं हाथ क्रमश: अभय मुद्रा और वरद मुद्रा में होते हैं। गले में एक सफेद माला धारण करती हैं। मां दुर्गा ने असुरों के राजा रक्तबीज का संहार करने के लिए अपने तेज से मां कालरात्रि को उत्पन्न किया था।
मां कालरात्रि की पूजा का महत्व
मां कालरात्रि की पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। और इस करोना महामारी को पूरे विश्व से समाप्त करना मां रक्षा करो अपने समस्त भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करें

मां दुर्गा पूजा विधि pooja vidhi

आज के दिन मां कालरात्रि का स्मरण करें। फिर माता को अक्षत्, धूप, गंध, पुष्प और गुड़ का नैवेद्य श्रद्धापूर्वक चढ़ाएं। मां कालरात्रि का प्रिय पुष्प रातरानी है, यह फूल उनको जरूर अर्पित करें। इसके बाद मां कालरात्रि के मंत्रों का जाप करें तथा अंत में मां कालरात्रि की आरती करें। ऐसा करने से आप पर आने वाले संकट दूर होंगे। ध्यान रखें कि आरती और पूजा के समय आपका सिर खुला न रहे, उसे किसी साफ कपड़े से ढंक लें।
आप सभी महानुभावों को नवरात्रों की बहुत-बहुत शुभकामनाएं

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