नवरात्र में दुर्गा माता किस वाहन से धरती पर आएंगी और जाएंगी

नवरात्र में दुर्गा माता

नवरात्र में दुर्गा माता नवरात्र का पहला दिन और अन्तिमवां दिन तय करता है किस वाहनसे धरती पर आएंगी देवी दुर्गा माता, किस वाहनसे वापस जाएंगी और क्या होगा उसका असर?

श्रीमद्देवीभागवतके अनुसार –

शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे।
गुरौ शुक्रे च दोलायां बुधे नौका प्रकी‌र्त्तिता॥

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अर्थ :- सोमवार व रविवारको प्रथम पूजा अर्थात् कलश स्थापना होनेपर, मां दुर्गा हाथीपर सवार होकर आती हैं। शनिवार और मंगलवारको नवरात्र शुरू होनेपर माताका वाहन घोड़ा होता है। गुरुवार या शुक्रवारको नवरात्र शुरू होनेपर माता डोलीमें बैठकर आती हैं। बुधवारको नवरात्र शुरू होनेपर माता नावपर सवार होकर आती हैं।
माताका वाहन और उससे होनेवाला असर –
माता दुर्गा जिस वाहनसे पृथ्वीपर आती हैं, उसके अनुसार सालभर होनेवाली घटनाओंका भी आंकलन किया जाता है। यथा –
गजे च जलदा देवी क्षत्रभंगस्तुरंगमे।
नौकायां सर्वसिद्धि स्याद्दोलायां मरणं धुवम्।।
अर्थ:- देवी माता, जब हाथीपर सवार होकर आती हैं, तो पानी ठीक तरह बरसता है। घोड़ेपर आती हैं, तो पड़ोसी देशोंके साथ युद्धकी आशंका बढ़ जाती है। देवी नौकापर आती हैं, तो सभीकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और डोलीपर आती हैं, तो महामारीका भय बना रहता है।

नवरात्र में दुर्गा माता किस दिन कौन से वाहनपर सवार होकर जाती हैं

नवरात्र में दुर्गा माता नौ दिनोंतक अर्थात् नवमीकी राततक आराधन की गयी माताका विसर्जन दशमीके दिन, मध्याह्नको विजया पूजाके बाद (दोपहर) में करनेका विधान है। इस बार (2020 में) 25 अक्तू. रविवारकी सुबह 7:41 बजे नवमी समाप्त हो – दशमीका अागमन होगा, जो 26 की सुबह 8:59 पर समाप्त होगी। अतः विजया पूजा 25 अक्तू. के ही दिन होना निश्चित है। माताका विसर्जन अर्थात् वापसी इसी (रविवारके) दिन होगी।
माता दुर्गा आती भी वाहनसे हैं और जाती भी वाहनसे ही। यानी जिस दिन नवरात्रका अन्तिम दिन होता है, उसीके अनुसार देवीका वाहन भी तय होता है।

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(श्रीमद्देवी भागवत के अनुसार)

शशिसूर्यदिने यदि सा विजया,
महिषागमने रुजशोककरा।
शनिभौमदिने यदि सा विजया,
चरणायुधयानकरी विकला॥
बुधशुक्रदिने यदि सा विजया,
गजवाहनगा शुभ वृष्टिकरा।
सुरराजगुरौ यदि सा विजया,
नरवाहनगा शुभ सौख्यकरा॥

अर्थ:- रविवार और सोमवारको देवी भैंसेकी सवारी से जाती हैं तो देशमें रोग और शोक बढ़ता है। शनिवार और मंगलवारको देवी मूर्गेपर सवार होकर जाती हैं, जिससे दुःख और कष्टकी वृद्धि होती है। बुधवार और शुक्रवारको देवी हाथीपर जाती हैं, इससे बारिश अच्छी, सुवृष्टि होती है। गुरुवारको मां भगवती मनुष्यकी सवारीसे जाती हैं, इससे जीव – जगतमें सुख और शान्तिकी वृद्धि होती है।

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 नवरात्र में दुर्गा इस बार –

शारदीय नवरात्रोंका पहला दिन शनिवार पडा है, देवी दुर्गा – घोडा वाहनसे आरही हैं। इसका फल बताया है – पडोसियोंके साथ युद्ध छिड जाय। और विजया दशमी पडी है अर्थात् माताके वापस जानेका दिन – रविवार को पडा है। अतः उपरोक्त फल कथनके अनुसार –
शशिसूर्यदिने यदि सा विजया,
महिषागमने रुजशोककरा। के अनुसार रविवारके दिन दोपहर, विजया पूजा लेकर माता वापस जाएंगी। इसका अर्थ सु – स्पष्ट है – “महिषागमने रुजशोककरा” अर्थात् भैंसेकी सवारीसे जारही हैं।
माताके आतेमें घोडेकी सवारी और वापसीमें भैंसेकी सवारीका तात्पर्य होता है – पडोसियोंके साथ विरोध व अपनेमें “रोग – शोक” आदिका सामना करना पडेगा।
सिद्धान्तका कहना निर्विवाद सत्य होता है, इसमें दो मत नहीं हैं। फिर भी “माता तो माता ही होती है।” इसलिए भक्तिपूर्वक उनकी विशुद्ध आराधना करें, अपनी माँ सदृश मानकर उनकी शरणमें रहनेंवालोंका कुछ बिगडता भी नहीं। अपना स्वार्थ रखकर करनेवालोंके विषयमें कहा नहीं जा सकता।

आखिर माँ तो माँ ही होती है

है ना
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   आचार्य पंकज पुरोहित

kushmanda devi temple ruderapryag कुष्मांडा देवी मंदिर रुद्रप्रयाग उत्तराखंड

One thought on “नवरात्र में दुर्गा माता किस वाहन से धरती पर आएंगी और जाएंगी

  • October 17, 2020 at 4:35 pm
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    Bhut sundr jankari p ji .Jai matadi

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