लोहड़ी और मकर संक्रांति महापर्व का पुण्य काल | The virtuous period of Lohri and Makar Sankranti Mahaparva

लोहड़ी  और मकर संक्रांति 

लोहड़ी का त्योहार हर साल सूर्य के मकर राशि में आने के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। सूर्य जिस दिन मकर राशि में प्रवेश करने वाले होते हैं उस दिन से ठीक एक दिन पहले देश के कई भागों में बड़े ही आनंद और उल्लास से लोहड़ी का त्योहार मनाया जाता।
इस दिन लोहड़ी Lohri और इस दिन मकर संक्रांति
ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस साल सूर्य का मकर राशि में आगमन 14 तारीख की मध्य रात्रि में 2 बजकर 7 मिनट पर होने जा रहा है। ऐसे में मकर संक्रांति का त्योहार 15 जनवरी को पूरे देश में मनाया जाएगा जबकि लोहड़ी पर्व 13 जनवरी को परंपरागत तरीके के साथ मनाया जाएगा
मूंगफली, गुड़, तिल और गजक की मिठास

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लोहड़ी Lohri पूजन का शुभ मुहूर्त शाम में 5 बजकर 45 मिनट के बाद रहेगा क्योंकि शाम में 4 बजकर 26 मिनट के बाद से 5 बजकर 45 मिनट तक रोग काल रहेगा। लोहड़ी पर्व मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और जम्मू कश्मीर में मनाया जाता है। इसकी तैयारी लोहड़ी से कुछ दिन पहले से ही शुरू हो जाती है। लोहड़ी में मूंगफली, गुड़, तिल और गजक का विशेष महत्‍व माना जाता है।
सुंदरी और मुंदरी की कहानी
इस त्योहार में शाम के समय खुली जगह पर लोहड़ी जलाई जाती है। इस पवित्र अग्नि में मूंगफली, गजक, तिल, मक्का डालते हुए अग्नि की परिक्रमा की जाती है। लोग इस अग्नि के पास लोकगीत गाते हुए उत्सव मनाते हैं। यह अग्नि दुल्ला भट्टी की याद दिलाती है

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जिन्होंने जंगल में आग जलाकर सुंदरी और मुंदरी नाम की दो गरीब लड़कियों की शादी करवायी थी। ऋतु परिवर्तन से जुड़ा लोहड़ी का त्योहार शीत ऋतु के जाने और वसंत ऋतु के आगमन लिए भी मनाया जाता है
ऐसे मनाते हैं लोहड़ी
लोहड़ी की अग्नि में रबी की फसलों (जौ,चना,मसूर,सरसों,गेहूं,मटर,मक्का) को अर्पित किया जाता है। इसी वक्‍त पंजाब में फसलों की कटाई शुरू होती है। देवताओं को नई फसल का भोग लगाकर पूरे साल के लिए भगवान से धन और संपन्‍नता की प्रार्थना की जाती है। महिलाएं, पुरुष और बच्‍चे सभी पवित्र अग्नि के चारों ओर नृत्‍य करते हुए लोकगीत और भजन गाते हैं। लोहड़ी की रात को सबसे सर्द और सबसे लंबी रात माना जाता है।
आप सभी महानुभावों को लोहड़ी महापर्व की बहुत-बहुत शुभकामनाएं 

आचार्य पंकज पुरोहित