Chaitra Navratri 2020 kalash sthaapana | चैत्र नवरात्रि

चैत्र नवरात्रि Chaitra Navratri

चैत्र नवरात्रि Chaitra Navratri पर महासंयोग 178 वर्ष बाद बना है, मां की कृपा पाने के लिए इस शुभ मुहूर्त में करें कलश स्थापना चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ऐसे करें  जानें सामग्री, मुहूर्त एवं विधि के बारे में वसंतिक नवरात्रि या चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ कल से यानी बुधवार से हो रहे हैं

नवरात्रि में नौ देवियों की आराधना से पूर्व घट स्थापना या कलश स्थापना किया जाता है। कलश स्थापना मुख्यत: नौ दिन तक व्रत रखने वाले लोग करते हैं, लेकिन कई जगहों पर जो लोग नवरात्रि में प्रतिपदा और अष्टमी के दिन व्रत रखते हैं, वे भी कलश स्थापना करते हैं। कलश स्थापना शुभ मुहूर्त में किया जाता है,

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ऐसा करना फलदायी माना जाता है। यदि आप नवरात्रि का व्रत रखने वाले हैं तो आपको कलश स्थापना की तैयारी पहले से ही कर लेनी चाहिए। आप स्वयं घर पर कलश स्थापना करना चाहते हैं तो उसकी सामग्री, मुहूर्त, विधि आदि के बारे में जान लें। https://livecultureofindia.com/chaitra-navratri…-sthaapana-vidhi/ ‎

कलश स्थापना मुहूर्त Chaitra Navratri kalash sthaapana muhoort
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि प्रारंभ 24 मार्च दिन मंगलवार को दोपहर 02 बजकर 57 मिनट पर हो रहा है, जो 25 मार्च दिन बुधवार को शाम 05 बजकर 26 मिनट  तक रहेगा। बुधवार सुबह कलश स्थापना के लिए 58 मिनट का शुभ समय प्राप्त हो रहा है। आप सुबह 06 बजकर 19 मिनट से सुबह 07 बजकर 17 मिनट के मध्य कलश स्थापना कर सकते हैं। और कहीं भक्त जन इसके बाद भी कर सकते हैं
कलश स्थापना या घट स्थापना की सामग्री
कलश स्थापना के लिए आप मिट्टी का कलश उपयोग करें तो उत्तम होगा, यदि संभव नहीं है तो फिर लोटे को कलश बना सकते हैं। कलश स्थापना में आपको एक कलश, स्वच्छ मिट्टी, थाली, कटोरी, जल, ताम्र कलश, मिट्टी का पात्र, दूर्वा, इत्र, चन्दन, चौकी, लाल वस्त्र, रूई,

नारियल, चावल, सुपारी, रोली, मौली, जौ, धूप, दीप, फूल, नैवेद्य, अबीर, गुलाल, केसर, सिन्दूर, लौंग, इलायची, पान, सिंगार सामग्री, शक्कर, शुद्ध घी, वस्त्र, आभूषण, बिल्ब पत्र, यज्ञोपवीत, दूध, दही, गंगाजल, शहद आदि की आवश्यकता पड़ेगी।
कलश स्थापना या घट स्थापना विधि kalash sthaapana ya ghat sthaapana vidhi
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को प्रात:काल स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर कलश स्थापना के लिए सामग्री पूजा स्थल पर एकत्र कर लें। अब एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित कर दें।

इसके पश्चात मां दुर्गा के बाईं ओर सफेद वस्त्र पर 9 कोष्ठक नौ ग्रह के लिए बनाएं और लाल वस्त्र पर 16 कोष्ठक मातृका के लिए बना लें। इतना करने के बाद कलश के गले में मौली या रक्षा सूत्र बांधें और उस पर रोली से स्वास्तिक बनाएं।
इसके पश्चात कलश स्थापना करें फिर कलश में जल भरें तथा आम की पत्तियां डाल दें। इसके बाद एक मिट्टी के पात्र में चावल लें और उस पर नारियल के गोले में रक्षा सूत्र लपेट कर रखें। उस पात्र को कलश के ऊपर  रख लें। अब एक अखंड दीपक जलाकर वहां रखें।

इसके अलावा मिट्टी के पात्र में जौ को मिट्टी के साथ भर लें और उसे जल से सिंचित करें। अब उस पात्र को माता रानी की चौकी के बाईं ओर स्थापित करें।
यह कलश स्थापना की संपूर्ण विधि है। कलश स्थापना के बाद मां शैलपुत्री की विधिपूवर्क पूजा करें।
आप सभी महानुभावों को चैत्र नवरात्रों की बहुत-बहुत शुभकामनाएं

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आचार्य पंकज पुरोहित

जय माता दी