तुलसी के औषधीय गुण व उपयोग | Medicinal properties of basil,

तुलसी-basil

तुलसी के औषधीय गुण के कारण आयुर्वेद में स्वास्थ्य के लिए तुलसी के पौधे के हर भाग को लाभकारी माना गया है.बस इसकी उपयोग की सही जानकारी होनी चाहिए

तुलसी को सुरसा, बहुमंजरी, देवदुन्दुभि, holy basil भी कहते हैं। इसका पौधा प्रायः सभी घरों मे पाया जाता है। इसका छोटा सा पौधा घरों की शोभा तो बड़ाता ही है साथ ही इसका अध्यात्मिक एवं औषधीय उपयोग भी बहुत अधिक है। इसका वेज्ञानिक नाम Ocimum sanctum

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तुलसी के पौधे को वैज्ञानिक तरीके से देखा जाए तो यह पौधा रात के समय में भी ऑक्सीजन उत्सर्जन करता है जबकि बाकी ज्यादातर पौधे रात के समय कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं , तुलसी में कई औषधीय गुण होते हैं, हिंदू धर्म में तुलसी के पौघे की पूजा भी की जाती है जिसका लेख धर्म ग्रंथों शास्त्रों में भी मिलता है

तुलसी के औषधीय गुण व उपयोग

तुलसी के औषधीय गुण व उपयोग बहुत से हैं जिसे आप इसे उपयोग में ला सकते हैं तुलसी के पत्ते की तासीर गर्म होती है

तुलसी उष्ण होती है अतः यह वात एवं कफ नाशक होती है वातज एवं कफज रोगों मे इसका प्रयोग अन्य औषधियों के साथ भी बहुत लाभकारी है।

तुलसी को भुतघ्नी कहते हैं क्योंकि यह उत्तम कीटाणुनाशक अर्थात antiseptic and antiboiotic है। Immune booster का भी काम करता है। इसलिए घाव के संक्रमन मे एवं अन्य त्वचा रोग जैसे खाज खुजली मे इसके पत्तों को पीसकर लेप एवं तुलसी रस का सेवन करना चाहिए। पेट की कृमि मे भी इसका स्वरस पियें या 5,7 पत्तों को खाली पेट चबाना चाहिए।

तुलसी बीज व पत्र पाचन दीपन होते हैं इसलिए अपच व अग्निमान्ध्य मे इसका सेवन करना चाहिए। वात नाशक होने से उदर शूल मे भी लाभकारी है।

तुलसी श्वास कास नाशक के साथ साथ उत्तम क्षय नाशक अर्थात TB नाशक है। यह streptomycin और isoniazid की तुलना मे कही गुनि जादा पॉवरफुल है इसलिए TB एवं अस्थमा के रोगियों को इसका सेवन नियमित रूप से करना चाहिए। श्वास की समस्या मे वात कफ की प्रधानता होती है और तुलसी उत्तम वात कफ नाशक है।

तुलसी के बीज मूत्रल होते हैं अर्थात पेशाब को प्रवृत्त करते हैं इसलिए जिनको पेशाब कष्ट के साथ होती है उनको तुलसी बीज का सेवन करना चाहिये।

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वात कफज समस्या जैसे विषम ज्वर अर्थात मलेरिया मे तथा प्रतिस्याय, सर्दी जुकाम मे तुलसी को मरिच के साथ चबाना चाहिए। सर्दी जुकाम मे इसके बीज को चाय के साथ भी प्रयोग करने पे भी अच्छा लाभ देता है। मलेरिया मे इसका प्रयोग विशेष लाभकारी है।
तुलसी को मच्छर का दुश्मन भी करते है, जहॉ तुलसी का पौधा होगा वहाँ मच्छर नही होते, इसलिए भी मलेरिया मे विशेष उपयोगी माना गया है।

तुलसी मेध्य एवं रक्त शोधक है इसलिए 5,7 पत्तों का खाली पेट नियमित सेवन बुद्धि एवं शरीर के लिए उत्तम टॉनिक है।

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तुलसी के औषधीय गुण व उपयोग कुछ विशेष-

तुलसी में युजीनॉल भी पाया जाता है। तुलसी के ज्यादा सेवन से हमारे शरीर में युजीनॉल मात्रा बढ़ सकती है।जो शरीर के लिए हानिकारक भी हो सकता है।
तुलसी उष्ण होती है अतः पित्त प्रकोप के रोगियों को एवं ग्रभवती महिलाओं को इसका उपयोग वैद्य की सलाह से ही करना चाहिये।

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डॉ, मनवर सिंह BAMS

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