पीपल का पेड का आयुर्वेदिक महत्व | Ayurvedic Benefit of peepal

पीपल का पेड 

पीपल का पेड सुंदर दिखता क्योंकि इसके पत्ते आकर्षक होते हैं। सजावटी के साथ साथ अध्यात्मिक और औषधीय दृष्टी से भी महत्वपूर्ण है। पीपल के पेड़ और इसकी पत्तियों का आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसके के गुणों के बारे में बताया गया है पीपल के पेड़ को औषधियों का खजाना माना गया है।

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पीपल का पेड़ के अलग-अलग भगों जैसे पत्तों से लेकर छाल तक का प्रयोग जिसका उल्लेख आयुर्वेद के सुश्रुत संहिता और चरक संहिता में बताया गया है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता मे पीपल को अपना स्वरूप कहा है।

पीपल के पेड़ का हिन्दू धर्म में बहुत महत्व है. इस की हिंदू धर्म में पूजा की जाती है अकेला ऐसा पौधा जो दिन और रात दोनो समय आक्सीजन देता है जबकि अन्य पौधे रात को कर्बन डाई आक्साइड छोड़ते हैं।

पीपल का पेड का आयुर्वेदिक महत्व

पीपल का पेड आयुर्वेदिक महत्व आयुर्वेद के सुश्रुत संहिता और चरक संहिता में बताया गया है। इसका मुख्तया छाल एवं दूध औषधीय उपयोगी है लेकिन बीज, फल, पत्ते भी प्रयोग किये जा सकते हैं।

पीपल के ताजा 6-7 पत्ते लेकर 400 ग्राम पानी मे डालकर 100 ग्राम रहने तक मिट्टी या तांबे के बर्तन मे उबाले, आपका ह्रदय एक ही दिन में ठीक होना शुरू हो जाएगा।

पीपल का पेड के पत्तो पर भोजन करने से लीवर ठीक हो जाता है

यदि किसी को पुराना दमा हो तो पीपल का पेड के सूखे पत्तों को लेकर उसका पाउडर बनाएंऔर आधा चम्मच पाउडर को गुड़ में मिलाकर सुबह दोपहर शाम लें इससे किंतनी भी पुराना दमा की बीमारी हो वो ठीक हो जाती है|

पीलिया होने पर रोगी को पीपल का पेड के ताजा और हरे 4-5 पत्ते लें और उसे बारीक़ पीसें लेकर पीसकर पानी मे मिलाकर पिलाये, इससे रोगी को 1- 2 बार मे ही पीलिया में आराम मिलना सुरु हो जायेगा

घाव भरने के लिए पीपल का पेड की छाल को लें और उसे गंगाजल में घिसकर लें फिर उसे घाव पर लगाये इस से तुरंत आराम और घाव भर जायेगा

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नसे के आधी को नसा छुड़ाने के लिए पीपल का पेड की छाल लें और उस को खांड मिलाकर दिन में 5-6 बार चूसने को कहें, इससे कोई भी नशा छूट जाता है

फेफडे,अमाशय,और दिल लीवर से सम्बंधित सभी रोगों के लिए पीपल का पेड के पत्तों का काढ़ा बनाकर पिये, ये इन सभी रोगों को ठीक कर देता है। यहाँ तक किडनी के रोग,या पथरी को भी तोड़कर बाहर निकलता है

किंतना भी डिप्रेशन हो, पीपल के पेड़ के नीचे जाकर रोज 30 मिनट बैठिए डिप्रेशन खत्म कर देता है। पीपल के नीचे pranayam और योगा बहुत लाभकारी है।

महिलाओ के गर्भशाय और मासिक से सम्बन्धित में पीपल के ताजा कोपले और फलों को लेकर बराबर मात्रा में पिसें और उन्हें सुखायें उसके बाद पिस लें और खांड मिलाकर इसे दिन में 2 बार ले, रोग ठीक करगा

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बच्चे तुतला कर बोलते हैं उन के लिए पीपल का पेड के ताजा कोपले और फलों को लेकर बराबर मात्रा में पिसें और उन्हें सुखायें उसके बाद पिस लें और खांड मिलाकर इसे दिन में 2 बार दें इस से , बच्चो का तुतलाना ठीक हो जाता है साथ ही बचों का दिमाग भी बहुत तेज करता है

हाइपर एक्टिविटी वाले बच्चे जो बच्चे दिनभर रातभर दौड़ते भागते है कम सोते है, उन बच्चों को पीपल के पेड़ के नीचे बेठने से ये सब ठीक कर देता है

महिलाओ को मासिक समय मे रक्त अधिक आता हो,या बाबासीर में रक्त आता हो, दांत निकलवाने पर रक्त आये ,चोट लग जाये, शरीर मे कही से भी खून आये, पीपल 10 से 12 पत्ते पीसकर,छानकर पी जाएं, इससे रक्त का बहना तुंरत बंद हो जाता है|

पीपल का पेड के पत्तों को गर्म कर के सूजन हो, दर्द वाली जगह पर बांध ने से ठीक हो जाता है
ताजा सर्वे के अनुसार पीपल का आयुर्वेदिक महत्व पीपल का पेड की छाल का काड़ा वात रक्त खांसी cough मे जबरदस्त लाभ करता है।

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डॉ. मनवर सिंह BAMS