क्या होगा 30 दिन में तीन ग्रहण पड़ने का प्रभाव 21 जून 2020 सूर्य ग्रहण

तीन ग्रहण 30 दिन में

इस साल 5 जून से 5 जुलाई तक तीस दिनों में तीन ग्रहण पड़ रहे हैं. ये ग्रहण 5 जून, 21 जून और 5 जुलाई को पड़ेंगे. इस बार 30 दिन के अंतराल में तीन ग्रहण पड़ रहे हैं, जिनमें से दो चंद्र ग्रहण Lunar eclipse और एक सूर्य ग्रहण हैं. जहां तक भारत में ग्रहण के असर की बात है,

5 जून को और 5 जुलाई को जो चंद्र ग्रहण पड़ेगा, वो देशभर में कहीं दिखाई नहीं देगा, इसीलिए इन दोनों ग्रहण का कोई भी प्रभाव भारत में नहीं पड़ेगा। लेकिन 21 जून 2020 को पड़ने वाला सूर्यग्रहण साल का सबसे बड़ा ग्रहण है और ये सूर्यग्रहण जरूर इतिहास रचने वाला है, इसलिए इस ग्रहण के बारे में आपको संपूर्ण जानकारी होनी जरूरी है|

सूर्य ग्रहण solar eclipse

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ग्रहण लगने के वैज्ञानिक के साथ धार्मिक कारण भी माने जाते हैं। विज्ञान अनुसार सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है। जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के मध्य में आ जाता है तब सूर्य की किरणें पृथ्वी तक नहीं पहुँच पातीं इस घटना को ही सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

सूर्य ग्रहण धार्मिक दृष्टि एवं कथा

धार्मिक दृष्टि से देखा जाये तो ग्रहण पापी ग्रहों राहु और केतु के कारण लगता है। एक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान जब भगवान विष्णु देवताओं को अमृत पिलाने के उदेश्य से मोहिनी रूप लेते हैं तब सभी देवता और दानव उनकी बात मानकर एक लाइन में बैठ जाते हैं।

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विष्णु जी देवताओं को अमृत पिलाना शुरू करते हैं तभी एक राक्षस तो भगवान विष्णु पर शक होता है जिस कारण वह दानव देवताओं के बीच में आकर बैठ जाता है। इस बात की जानकारी सूर्य और चंद्र देव भगवान विष्णु को देते हैं। तभी भगवान विष्ण अपने सुदर्शन चक्र से उस राक्षक का सिर धड़ अलग कर देते हैं। लेकिन उस राक्षस के मुंह में अमृत की कुछ बूंदे चली गईं थीं। जिस कारण वह अमर हो गया।

उसका एक हिस्सा राहु तो दूसरा हिस्सा केतु कहलाया। तभी से राहु केतु सूर्य और चंद्र को अपना दुश्मन मानते हैं और अमावस्या के दिन वह सूर्य का तो पूर्णिमा के दिन चंद्रमा का ग्रास कर लेते हैं। लेकिन ये जरूरी नहीं कि हर अमावस्या या पूर्णिमा को ऐसा हो।
*21 जून 2020 को पड़ने वाला सूर्यग्रहण हमारे जीवन पर क्या प्रभाव डालने वाला है,इस ग्रहण से किन राशियों को क्या नुकसान और क्या लाभ होने वाला है, इस साल के सबसे बड़े सूर्यग्रहण के बारे में भारत में 21 जून 2020 को सूर्य ग्रहण सुबह से दोपहर तक संपूर्ण भारत में खंडग्रास के रूप में दिखाई देगा.

उत्तरी राजस्थान, उत्तरी हरियाणा और उत्तराखंड में इस ग्रहण का परमग्रास 994 प्रतिशत रहेगा. 21 जून 2020 को पड़ने वाला सूर्यग्रहण भारत के अलावा दक्षिणी-पूर्वी यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, फिजी, अफ्रीका, हिंद महासागर, पूर्वी एशिया, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, चीन, वर्मा, फिलीपीन्स में दिखाई देगा।

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                            सूर्य ग्रहण

सबसे बड़ा सूर्य ग्रहण 21 जून 2020 को लगने वाला सूर्य ग्रहण होगा बेहद संवेदनशील ग्रहों के वक्री होने से प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है। जैसे अत्याधिक वर्षा, समुद्री चक्रवात, तूफान, करोना जैंसी महामारी, आदि।

शनि, मंगल और गुरु के प्रभाव से विश्व में आर्थिक मंदी का असर एक वर्ष तक बना रहेगा। 21 जून को लगने जा रहे सूर्य ग्रहण के समय मंगल जलीय राशि मीन में स्थित होकर सूर्य, बुध, चंद्रमा और राहु को देखेंगे जिससे अशुभ स्थिति का निर्माण होगा। इसके अलावा शनि, गुरु, शुक्र, बुध, राहु, केतु वक्री अवस्था में होंगे।

इसे भी अशुभ माना जा रहा है। ग्रहण के समय इन बड़े ग्रहों के वक्री होने से प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है। जैसे अत्याधिक वर्षा, समुद्री चक्रवात, तूफान, करोना महामारी,आदि। शनि, मंगल और गुरु के प्रभाव से विश्व में आर्थिक मंदी का असर एक वर्ष तक बना रहेगा।
इस सूर्यग्रहण की अवधि- 5 घंटे 48 मिनट 03 सेकंड रहेगी

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आचार्य पंकज पुरोहित