असम और मिजोरम राज्यों की सीमा को लेकर विवाद, फायरिंग में 6 पुलिसकर्मियों की मौत

असम और मिजोरम भूमि विवाद को लेकर सोमवार को दोनों असम और मिजोरम राज्यों की सीमा पर तनाव बढ़ गया,दोनों राज्यों के बीच हिंसा हुई, पहले पत्थर और ईंट से हंगामा मचाया और उसके बाद अंधाधुंध फायरिंग शुरू हुई। अभी तक हमारे 6 पुलिसकर्मियों की जान गई है,असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथांगा ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए हैं। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दोनों नेताओं से इस विवाद का समाधान निकालने के लिए कहा है।

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असम-मिज़ोरम राज्यों की सीमा पर तनाव पर असम के कैबिनेट मंत्री परिमल शुक्ला बैद्य ने बताया,कुछ दिन से दिक्कत चल रही थी। हमारी तरफ से एक भी फायरिंग नहीं हुई। उन लोगों ने पहले पत्थर और ईंट से हंगामा मचाया और उसके बाद अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दिया।अभी तक हमारे 6 पुलिसकर्मियों की जान गई है और 80 लोग घायल हैं।

असम-मिजोरम राज्यों की सीमा पर तनाव की स्थिति 30 जून से बनी हुई है तनाव के वजह का आरोप मिजोरम ने असम पर अतिक्रमण का लगाया असम ने कोलासिब में हमारी जमीन पर अतिक्रमण किया है। मिजोरम के तीन जिले (आइजल, कोलासिब और ममित) असम के कछार, करीमगंज और हेलाकांडी जिलों से करीह 164.4 किमी की सीमा साझा करते हैं।

असम-मिजोरम राज्यों की सीमा पर तनाव का इतिहास

असम-मिजोरम राज्यों की सीमा पर तनाव का इतिहास पुराना है। औपनिवेशवादी काल में मिजोरम असम का एक जिला हुआ करता था, दोनों राज्यों के बीच चल रहा सीमा विवाद इसी औपनिवेशिक काल से ही चला आ रहा है इस जिले को तह लुशाई हिल्स के नाम से जाना जाता था। ब्रिटिश राज के समय प्रशासनिक जरूरतों के मुताबिक अंदरूनी सीमाओं में बदलाव किया गया था। असम-मिजोरम सीमा विवाद ब्रिटिश काल के तहत पारित दो अधिसूचनाओं से उपजा है। मिजोरम राज्य अधिनियम 1986 के जरिए साल 1987 में मिजोरम को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला था। असम साल 1950 में भारत का संवैधानिक राज्य बना था और 1960 व 1970 के दशक की शुरुआत में नए राज्य बनने से इसके पास से भूमि का बड़ा हिस्सा निकल गया।

सीमांकन के लिए पारित इन अधिसूचनाओं में से पहली, 1875 की अधिसूचना है, जिसने लुशाई हिल्स को कछार के मैदानी इलाकों से अलग किया। दूसरी, 1933 की अधिसूचना जिसने लुशाई हिल्स और मणिपुर के बीच सीमा तय की। मिजोरम का मानना है कि सीमा का निर्धारण 1875 की अधिसूचना के आधार पर होना चाहिए जो बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन अधिनियम 1973 से निकली थी।

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मिजोरम के नेता 1933 की अधिसूचना को स्वीकार नहीं करते हैं। उनका कहना है कि इसमें मिजोरम के समाज से सलाह नहीं ली घई थी। वहीं, असम सरकार 1933 के सीमांकन को स्वीकार करती है। इसी के परिणाम स्वरूप दोनों राज्यों के बीच विवाद चला आ रहा है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा-मैं ज़मीन की एक इंच भी किसी को नहीं दे सकता, अगर कल संसद एक क़ानून बना दे कि बराक वैली को मिज़ोरम को दिया जाए, तो मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है। परन्तु जब तक संसद यह फैसला नहीं लेती, मैं किसी भी व्यक्ति को असम की ज़मीन नहीं लेने दूंगा,

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