उपराष्ट्रपति ने चुनावों को अधिक समावेशी बनाने के लिए 75 प्रतिशत मतदान सुनिश्चित करने का किया आह्वाहन

देश भर में 25 जनवरी, 2022 को 12वां राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया गया। नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने इस अवसर पर वर्चुअल तौर पर अपना संदेश दिया। अपने संदेश में, उपराष्ट्रपति  ने  चुनाव आयोग तथा मतदाताओं से अगले आम चुनावों में 75% तक मतदान प्रतिशत हासिल करने का आह्वाहन किया जिससे चुनावी लोकतंत्र और अधिक समावेशी बन सके। उन्होंने एक साथ चुनाव कराए जाने के विषय पर भी सहमति बनाने का आग्रह किया जिससे प्रगति की गति निर्बाध रहे।

12वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर अपने संदेश में श्री नायडू ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि एक भी मतदाता न छूटे। उन्होंने मतदाताओं से कहा कि चुनावों में उम्मीदवार के गुण दोष की जांच कर, उस के आधार पर मत देने का निर्णय करें। उपराष्ट्रपति कोविड से संक्रमित हैं तथा उन्होंने स्वयं को हैदराबाद में अपने आवास पर ही आइसोलेट कर लिया है। नई दिल्ली में इस आयोजन में उनकी अनुपस्थिति में उनका वक्तव्य पढ़ा गया।

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1952 में पहली लोकसभा के लिए हुए आम चुनावों में 44.87% मत प्रतिशत रहा था जो 2019 में 17वीं लोकसभा के लिए हुए आमचुनावों में लगभग 50% बढ़ कर 67.40% तक पहुंच गया। इस उपलब्धि के लिए उपराष्ट्रपति ने सभी संबद्ध हितधारकों की सराहना की। विगत 70 वर्षों में लगातार बेहतरी हासिल करने के चुनाव आयोग के निरंतर प्रयासों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आयोग ने एक विश्वसनीय, जवाबदेह और प्रगतिशील संस्था के रूप में अपनी प्रतिष्ठा स्थापित की है जिस पर लोकतंत्र के हर हिमायती को गौरव करना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारे चुनावी लोकतंत्र को अधिक समावेशी बनाने के लिए हर चुनाव में मत प्रतिशत बढ़ाना और मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के रास्ते में आने वाली बाधाओं का समाधान करना, ये चुनाव आयोग के सामने चुनौती रही है।

उपराष्ट्रपति ने आह्वाहन किया कि आज़ादी के 75वें वर्ष में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी मतदाता न छूटे तथा अगले आम चुनावों के लिए 75% प्रतिशत मतदान हासिल करने का लक्ष्य रखा जाय। उन्होंने कहा कि यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि मताधिकार महज अधिकार नहीं बल्कि एक दायित्व है। श्री नायडू ने हमारी संघीय व्यवस्था के तीनों स्तरों के चुनाव एक साथ कराए जाने पर विचार विमर्श करने तथा एक राष्ट्र के रूप में सहमति बनाने का आग्रह किया जिससे चुनावों के बाद जन कल्याण और प्रगति की गति निर्बाध बनी रहे।

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