उपराष्ट्रपति ने राज्य सरकारों और कॉरपोरेट संस्थाओं से भारतीय खेलों को प्रोत्साहन देने का आग्रह किया

उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडू ने आज हॉकी जैसे पारंपरिक भारतीय खेलों के गौरव को पुनः हासिल करते हुए इसे शीर्ष पर ले जाने का आह्वान किया। उन्होंने राज्य सरकारों और कॉरपोरेट संस्थाओं से इस दिशा में आवश्यक प्रोत्साहन के लिए मिलकर कार्य करने का आग्रह किया।

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उप-राष्ट्रपति निवास में आज सामाजिक कार्यकर्ता और राष्ट्रवादी श्री चमन लाल की स्मृति में डाक टिकट जारी करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम के हालिया प्रदर्शन ने खेलों में रुचि को फिर से जगाया है और अब हॉकी और कबड्डी जैसे पारंपरिक भारतीय खेलों को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देना का समय आ गया है। उन्होंने कृत्रिम टर्फ सहित बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण एवं प्रशिक्षकों की उपलब्धता को भी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। श्री नायडू ने भारतीय खेलों के प्रति केन्द्र सरकार द्वारा दिए जा रहे सक्रिय प्रोत्साहन की भी सराहना की।

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दूसरों की आँख मूंदकर नकल करने की औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागने का आह्वान करते हुए,उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमें अपनी महान परंपरा और संस्कृति पर गर्व महसूस करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय हर क्षेत्र में प्रतिभा से संपन्न है और इस प्रतिभा के लिए बस सही प्रोत्साहन और समर्थन की आवश्यकता है।

उपराष्ट्रपति ने श्री चमन लाल को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन निःस्वार्थ भाव से देश और लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया। उन्होंने श्री चमन लाल को एक महान राष्ट्रवादी और दूरदर्शी विचारक बताते हुए कहा कि उनके जीवन का दर्शन सेवा, मूल्यों और रचनात्मकता की विशेषता है। श्री नायडू ने कहा कि 1942 में पंजाब विश्वविद्यालय (लाहौर) में एमएससी में स्वर्ण पदक प्राप्त करने के बावजूद, उन्होंने सेवा का मार्ग चुना, भले ही उनका भविष्य उज्ज्वल था,परन्तु इसके साथ-साथ उन्होंने सेवा में आध्यात्मिकता का भाव बनाए रखा।

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Village Life in Uttarakhand India part 3

उपराष्ट्रपति ने कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की सच्ची भावना में, श्री चमनलाल ने विदेशों में सदियों से रह रहे प्रवासी भारतीयों को उनकी मातृभूमि से सफलतापूर्वक जोड़ा और उनमें भारतीयता की भावना का संचार किया। उन्होंने दुनिया भर में फैले भारतीय लोगों का वैश्विक नेटवर्क बनाने का अथक प्रयास किया, श्री नायडू ने कहा आज सभी प्रवासी भारतीय हमारे सांस्कृतिक प्रतिनिधि हैं और भारत को उनकी सफलता से पहचान मिलती है।

विश्व अध्ययन केन्द्र के संदर्भ में श्री चमन लाल को इसकी प्रेरणा बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कहा कि यह केन्द्र वैश्विक मंच पर भारत की उपलब्धियों को उजागर करने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने विश्वभर में श्री चमन लाल की जन्मशती का आयोजन करने के लिए विश्व अध्ययन केन्द्र को बधाई दी। उपराष्ट्रपति भारत सरकार के संचार मंत्रालय के द्वारा श्री चमन लाल जी जैसे प्रेरक व्यक्तित्व के सम्मान में डाक टिकट जारी करने के निर्णय का भी स्वागत किया।

इस अवसर पर, केंद्रीय रेल, संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना-प्रौदयोगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव, संचार राज्य मंत्री श्री देवुसिंह चौहान, कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री श्री राजीव चंद्रशेखर, संसद सदस्य डॉ. हर्षवर्धन, डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी, डॉ. विनय सहस्रबुद्धे और श्री विनीत पांडे, सचिव (डाक) एवं अन्य गणमान्य भी शामिल हुए।