17 मई को खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट,पंचमुखी डोली हुई केदारनाथ धाम लिए रवाना

17 मई को केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंगे और इसके साथ ही चार धाम यात्रा शुरुवात हो जाएगी, आज 14 May 2021 अक्षय तृतीया को बाबा केदारनाथ की डोली ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ से केदारनाथ धाम के लिए रवाना हो गई है। इसी के साथ बाबा केदार के कपाट खोलने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाती है।

https://livecultureofindia.com/national-राष्ट्रीय-news/केदारनाथ-धाम-के-कपाट/

इस अवसर पर रावल भीमाशंकर लिंग, पुजारी बागेश लिंग, देवस्थानम बोर्ड के अपरमुख्य कार्यकारी अधिकारी बी.डी. सिंह, कार्याधिकारी एनपी जमलोकी, डोली प्रभारी यदुवीर पुष्पवान सहित प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।

देवस्थानम बोर्ड के मीडिया प्रभारी डा.हरीश गौड़ ने बताया कि 17 मई को प्रात:पांच बजे श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंगे। अभी कोरोना महामारी को देखते हुए चारधाम यात्रा स्थगित है अत: केवल मंदिरों के कपाट खुल रहे है।

अभी धाम में जाने की अनुमति केवल पूजापाठ से जुड़े कुछ ही लोगों को दी गयी है। आज दिन में 12.15 बजे श्री यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे। जबकि कल 15 मई गंगोत्री धाम एवं 18 मई प्रात: को श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुल रहे है।

इस बार चार धाम यात्रा में खास

इस बार कोरोना संक्रमण के चलते चार धाम यात्रा को फिलहाल श्रद्धालु के लिए स्थगित किया गया है। आम श्रद्धालु नहीं जा पाएंगे। सरकार ने श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस बार भक्तों के लिए चारधाम के वर्चुअल दर्शन कराने की तैयारी कर रही है। जिससे श्रद्धालु घर बैठे कर चारधाम के दर्शन कर सकेंगे। चार धाम यात्रा के लिए पहले ही एसओपी जारी कर दी गई थी। जिसके अनुसार बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री एवं यमुनोत्री में केवल रावल, पुजारीगण और मंदिरों से जुड़े स्थानीय हक हकूक धारी,तीर्थ पुरोहित, पुरोहित, कर्मचारी व अधिकारी ही जा पाएंगे,लेकिन इन सब की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव होना जरूरी होगी।

कृपया इन्हें भी पढ़ें और वीडियो भी देखें

त्रिजुगी नारायण मंदिर

उखीमठ ओमकारेश्वर मंदिर रुद्रप्रयाग 

गठिया,साइटिका,घरेलू उपचार

कपड़े से बना मास्क MASK कितना बेहतर

अपने घर के मंदिर में पूजा और ध्यान रखने वाली जरूरी बातें

उत्तराखण्ड के पहाड़ी गांव का रहन सहन

सिंपल वेज बिरयानी रेसिपी 

चेहरे से मुंहासे हटाए

चलिए जानते है अक्षय तृतीया क्यों है खास

अक्षय तृतीया ,आखा तीज, भी कहते हैं अक्षय का मतलब है जिसका कभी क्षय (नाश) न हो,अक्षय तृतीया अपने आप में स्वयं सिद्ध मुहूर्त है कोई भी शुभ कार्य का प्रारम्भ इसी दिन से किया जा सकता है, इस दिन कि कुछ महत्वपुर्ण जानकारियाँ ,अक्षय तृतीया के दिन ही ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का अवतरण। इसी दिन माँ अन्नपूर्णा का जन्म।,चिरंजीवी महर्षी परशुराम का जन्म हुआ था इसीलिए आज परशुराम जन्मोत्सव भी हैं।इसी दिन कुबेर को खजाना मिला था।अक्षय तृतीया के दिन ही माँ गंगा का धरती अवतरण हुआ था। अक्षय तृतीया के दिन ही सूर्य भगवान ने पांडवों को अक्षय पात्र दिया। इसी दिन महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था।और इसी दिन वेदव्यास जी ने महाकाव्य महाभारत की रचना गणेश जी के साथ शुरू किया था।अक्षय तृतीया के दिन प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ ऋषभदेवजी भगवान के 13 महीने का कठीन उपवास का पारणा इक्षु (गन्ने) के रस से किया था। अक्षय तृतीया के दिन प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री बद्री नारायण धाम का कपाट खोले जाते है।अक्षय तृतीया के दिन बृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर में श्री कृष्ण चरण के दर्शन होते है। और इसी दिन जगन्नाथ भगवान के सभी रथों को बनाना प्रारम्भ किया जाता है।अक्षय तृतीया के दिन ही आदि शंकराचार्य ने कनकधारा स्तोत्र की रचना की थी।

सुनील जमलोकी

Omkareshwar Temple Ukhimath Uttarakhand Documentary film