क्या है शून्य बजट प्राकृतिक खेती, सम्मेलन को 16 दिसंबर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संबोधित करेंगे

शून्य बजट प्राकृतिक खेती पूरी तरह से प्राकृतिक संसाधनों परनिर्भर खेती है। पूरी तरह से प्राकृतिक संसाधनों परनिर्भर होने के कारण इसेभारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति नाम दिया गया है। इस प्रकार की खेती में रासायनिक खाद की जगह इसमें देसी खाद जिसे घन जीवा अमृत कहते हैं का इस्तेमाल किया जाता है।

शून्य बजट की खेती के लिए देसी गाय के गोबर, गौमूत्र, चने के बेसन, गुड़, मिट्टी व पानी से खाद तैयार की जाती है पारंपरिक क्षेत्र आधारित प्रौद्योगिकियों पर भरोसा करके कृषि की लागत को कम करने के लिए एक आशाजनक उपकरण के रूप में पहचाना गया है जिससे मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह कृषि पद्धतियों को एकल-फसल से विविध बहु-फसल प्रणाली में स्थानांतरित करने पर जोर देता है।

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प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी 16 दिसंबर को सुबह 11 बजे से कृषि और खाद्य प्रसंस्करण पर राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करेंगे, जिसमें प्राकृतिक खेती की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की जाएगी। यह शिखर सम्मेलन 14 से 16 दिसंबर 2021 तक गुजरात के आणंद में आयोजित होने वाले प्री-इवेंट गुजरात शिखर सम्मेलन से पहले एक हिस्से के रूप में आयोजित किया जा रहा है।

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शून्य बजट प्राकृतिक खेती के इस सम्मेलन में 5000 किसान शामिल होंगे जो शिखर सम्‍मेलन में मौजूद रहेंगे। इसके अलावा राज्यों में आईसीएआर के 80 केन्‍द्रीय संस्थान, कृषि विज्ञान केन्‍द्र और एटीएमए नेटवर्क भी किसानों को प्राकृतिक खेती के अभ्यास और लाभों के बारे में जानने और इस कार्यक्रम को लाइव देखने के लिए जोड़ेंगे। इसके अतिरिक्त,

सरकार ने पिछले छह वर्षों के दौरान किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि को बदलने के लिए कई उपाय शुरू किए हैं। प्रणाली की स्थिरता, लागत में कमी, बाजार पहुंच और किसानों को बेहतर प्राप्ति के लिए पहल को बढ़ावा देने और समर्थन देने के प्रयास चल रहे हैं।

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