अब नए अवतार में दिखेगा जलियांवाला बाग, पीएम नरेंद्र मोदी ने किया उद्घाटन

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जलियांवाला बाग स्मारक के पुनर्निर्मित परिसर को राष्ट्र को समर्पित किया।इस दोरान पंजाब के राज्यपाल वी पी सिंह बदनोर, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, केंद्रीय मंत्रिमंडल जी किशन रेड्डी , श्री अर्जुन राम मेघवाल ,भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम में शामिल हुए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा पंजाब की वीर भूमि को, जलियांवाला बाग की पवित्र मिट्टी को, मेरा अनेक-अनेक प्रणाम! मां भारती की उन संतानों को भी नमन, जिनके भीतर जलती आज़ादी की लौ को बुझाने के लिए अमानवीयता की सारी हदें पार कर दी गईं। वो मासूम बालक-बालिकाएं, वो बहनें, वो भाई, जिनके सपने आज भी जलियांवाला बाग की दीवारों में अंकित गोलियों के निशान में दिखते हैं। वो शहीदी कुआं, जहां अनगिनत माताओं-बहनों की ममता छीन ली गई, उनका जीवन छीन लिया गया। उनके सपनों को रौंद डाला गया। उन सभी को आज हम याद कर रहे हैं।

जलियांवाला बाग, वो स्थान है, जिसने सरदार उधम सिंह, सरदार भगत सिंह, जैसे अनगिनत क्रांतिवीरों, बलिदानियों, सेनानियों को हिंदुस्तान की आजादी के लिए मर-मिटने का हौसला दिया। 13 अप्रैल 1919 के वो 10 मिनट, हमारी आजादी की लड़ाई की वो सत्यगाथा, चिरगाथा बन गए, जिसके कारण आज हम आज़ादी का अमृत महोत्सव मना पा रहे हैं। ऐसे में आज़ादी के 75वें वर्ष में जलियांवाला बाग स्मारक का आधुनिक रूप देश को मिलना, हम सभी के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा का अवसर है।

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प्रधानमंत्री ने कहा हर राष्ट्र का दायित्व होता है कि वो अपने इतिहास को संजोकर रखे। इतिहास में हुई घटनाएं, हमें सिखाती भी हैं और आगे बढ़ने की दिशा भी देती हैं। जलियांवाला बाग जैसी ही एक और विभीषिका हमने भारत विभाजन के समय भी देखी है। पंजाब के परिश्रमी और जिंदादिल लोग तो विभाजन के बहुत बड़े भुक्तभोगी रहे हैं। विभाजन के समय जो कुछ हुआ, उसकी पीड़ा आज भी हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने में और विशेषकर पंजाब के परिवारों में हम अनुभव करते हैं। किसी भी देश के लिए अपने अतीत की ऐसी विभीषिकाओं को नजर-अंदाज करना सही नहीं है। इसलिए, भारत ने 14 अगस्त को हर वर्ष ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में आने वाली पीढ़ियों को याद रखें, इसलिये इसे मनाने का फैसला किया है। ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ आने वाली पीढ़ियों को भी याद दिलाएगा कि कितनी बड़ी कीमत चुकाकर, हमें स्वतंत्रता मिली है। वो उस दर्द, उस तकलीफ को समझ सकेंगे, जो विभाजन के समय करोड़ों भारतीयों ने सही थी।

गुरुबानी हमें सिखाती है- सुखु होवै सेव कमाणीआ।

अर्थात्, सुख दूसरों की सेवा से ही आता है। हम सुखी तभी होते हैं जब हम अपने साथ साथ अपनों की पीड़ा को भी अनुभव करते हैं। इसीलिए, आज दुनियाभर में कहीं भी, कोई भी भारतीय अगर संकट में घिरता है, तो भारत पूरे सामर्थ्य से उसकी मदद के लिए खड़ा हो जाता है। कोरोना काल हो या फिर अफगानिस्तान का वर्तमान संकट, दुनिया ने इसे निरंतर अनुभव किया है। ऑपरेशन देवी शक्ति के तहत अफगानिस्तान से सैकड़ों साथियों को भारत लाया जा रहा है। चुनौतियाँ बहुत हैं, हालात मुश्किल हैं, लेकिन गुरुकृपा भी हम पर बनी हुई है। हम लोगों के साथ पवित्र गुरुग्रंथ साहब के ‘स्वरूप’ को भी शीश पर रखकर भारत लाए हैं।

पंजाब में तो शायद ही ऐसा कोई गांव, ऐसी कोई गली है, जहां शौर्य और शूरवीरता की गाथा ना हो। गुरुओं के बताए रास्ते पर चलते हुए, पंजाब के बेटे-बेटियां, मां-भारती की तरफ टेढ़ी नज़र रखने वालों के सामने चट्टान बनकर खड़े हो जाते हैं। हमारी ये धरोहर और समृद्ध हो, इसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। गुरु नानक देव जी का 550वां प्रकाशोत्सव हो, गुरु गोबिंद सिंह जी का 350वां प्रकाशोत्सव हो, या फिर गुरु तेगबहादुर जी का 400वां प्रकाशोत्सव हो, ये सभी पड़ाव सौभाग्य से बीते 7 सालों में ही आए हैं। केंद्र सरकार ने प्रयास किया है कि देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में इन पावन पर्वों के माध्यम से हमारे गुरुओं की सीख का विस्तार हो। अपनी इस समृद्ध धरोहर को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए काम लगातार जारी है।

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आज़ादी का ये अमृतकाल पूरे देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस अमृतकाल में हमें विरासत और विकास को साथ लेकर चलना होगा, और पंजाब की धरती हमें हमेशा-हमेशा से इसकी प्रेरणा देती रही है। आज ये जरूरी है कि पंजाब हर स्तर पर प्रगति करे, हमारा देश चहुँ दिशा में प्रगति करे। इसके लिए हमें मिलकर काम करना होगा, ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, और सबका प्रयास’ की भावना के साथ-साथ हमें काम करते रहना होगा।