भारत की कला-संस्कृति को खिलौने और गेमिंग के जरिए से दिखा सकते हैं दुनिया को बोले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, टॉय-केथॉन-2021

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार 24 जून को वीडियो कॉफ्रेंसिंग के माध्यम से टॉय-केथॉन-2021 के प्रतिभागियों से बातचीत की। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री पीयूष गोयल और श्री संजय धोत्रे भी उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पिछले 5-6 वर्षों में देश के युवा है कथॉन के विभिन्न प्लेटफार्मों के माध्यम से देश की प्रमुख चुनौतियों से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि इसके पीछे देश की क्षमताओं को संगठित करने और उन्हें माध्यम प्रदान करने की सोच है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

टॉय-केथॉन क्या है

खिलौनों और गेम्स में रुचि रखने वलों के लिए  5 जनवरी 2021 को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय (Education Ministry) ने अपना गेम चैलेंज ‘टॉय-केथॉन ‘लॉन्च किया था।ये भारत का अपना गेम चैलेंज है टॉयकेथॉन राष्ट्रीय स्तर की एक प्रतियोगिता है, जिसका उद्देश्य है ऐसे खिलौने और गेम्स बनाना जो भारतीयसभ्यता,संस्कृति,इतिहास, मूल्यों और पौराणिक कथाओं (Mythology) पर आधारित हों।

टॉय-केथॉन राष्ट्रीय प्रतियोगिता  को जितने वालों को भारत सरकार (Govt of India) पुरुष्कार के तोर पर 50 लाख रुपये तक का इनाम देती है

प्रधानमंत्री ने इस तथ्य पर अफसोस व्यक्त किया कि बाजार में उपलब्ध अधिकांश ऑनलाइन और डिजिटल गेम भारतीय अवधारणाओं पर आधारित नहीं हैं और ऐसे कई गेम हिंसा को बढ़ावा देते हैं और मानसिक तनाव पैदा करते हैं। भारत में वर्चुअल, डिजिटल और ऑनलाइन गेमिंग में संभावनाएं तलाशने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने वैश्विक स्तर पर भारतीय खिलौनों को स्पर्धी बनाने के लिए नवाचार और वित्त पोषण के नए मॉडल का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नए विचार इनक्यूबेट करने, नए स्टार्ट-अप प्रोत्साहित करने, परंपरागत खिलौना बनाने वालों तक नई टेक्नोलॉजी को ले जाने और नई बाजार मांग बनाने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि टॉय-केथॉन जैसे आयोजनों के पीछे यही प्रेरणा है।

प्रधानमंत्री ने खिलौनों को बच्चों का पहला दोस्त होने के महत्व के अतिरिक्त खिलौना तथा गेमिंग के आर्थिक पहलुओं पर बल दिया और इसे ‘ट्वायकोनॉमी’ की संज्ञा दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व का खिलौना बाजार लगभग 100 बिलियन डॉलर का है और इस बाजार में भारत की हिस्सेदारी केवल 1.5 प्रतिशत है। भारत 80 प्रतिशत अपने खिलौनों का आयात करता है। इसका अर्थ यह हुआ कि खिलौना तथा गेमिंग के लिए करोड़ों रुपए देश से बाहर बहाए जा रहे हैं।

पढ़ें- moongphali khane ke fayde | Amazing benefits of peanuts

लौंग के फायदे in Hindi | 14 Benefits Of Cloves

नारियल की पूजा क्यों की जाती

सावन को सबसे पवित्र महीना क्यों कहा गया जानिए

कच्चे केले के छिल्के की चटनी

प्रधानमंत्री ने कहा कि इसे बदलना होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने खिलौना क्षेत्र में संख्या से अधिक समाज के जरूरतमंद वर्गों के लिए प्रगति और विकास लाने की क्षमता है। खिलौना क्षेत्र का अपना लघु उद्योग है। कारीगर गांव, दलित, गरीब और जनजातीय आबादी से आते हैं। प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को इंगित किया। इन वर्गों तक लाभों को ले जाने के लिए हमें लोकल (स्थानीय) खिलौनों के लिए वोकल होने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व भारत की क्षमताओं, कला और संस्कृति तथा समाज के बारे में सीखना चाहता है। खिलौने उसमें बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल गेमिंग के लिए भारत के पास पर्याप्त विषय और सामर्थ्य है।

प्रधानमंत्री ने युवाअन्वेषकों तथा स्टार्ट-अप का आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें भारत की क्षमताओं और विचारों की सही तस्वीर विश्व के सामने प्रस्तुत करने में अपने दायित्वों को ध्यान में रखना होगा।

वीडियो भी देखें

Documentary Film | Pandeva nrty | Uttarakhand India

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ अन्वेषकों और खिलौना उद्योग बनाने वालों के लिए विशाल अवसर है। उन्होंने कहा कि अनेक घटनाएं, स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों की कहानियों तथा उनके शौर्य और नेतृत्व को गेमिंग अवधारणाओं के रूप में तैयार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि ‘फोक विद फ्यूचर’ के साथ जोड़ने में इन अन्वेषकों की बड़ी भूमिका हो सकती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि रुचिकर और इंटरऐक्टिव गेम बनाने की आवश्यकता है जो ‘ इंगेज, इंटरटेन और एजुकेट’ कर सकें।

Culture Documentary उत्तराखंड में महाभारत का चक्रव्यूह

 

Leave a Reply