नहीं रहे ‘फ्लाइंग सिख’ मिल्खा सिंह, उन्‍होंने 91 साल की उम्र में चंडीगढ़ में ली आखिरी सांस

भारत के उड़न सिख फ्लाइंग सिख के नाम से प्रसिद्ध विख्यात महान फर्राटा धावक मिल्खा सिंह का करोना की जंग हार गये पिछले एक महीने से कोरोना संक्रमण से जूझने के बाद शुक्रवार देर रात 11:30 बजे चंडीगढ़ के पीजीआई अस्पताल में अंतिम सांस ली।

इससे पहले रविवार को उनकी 85 वर्षीया पत्नी और भारतीय वॉलीबॉल टीम की पूर्व कप्तान निर्मल कौर ने भी कोरोना संक्रमण के कारण दम तोड़ दिया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर ट्वीट किया
“श्री मिल्खा सिंह जी के निधन से, हमने एक महान खिलाड़ी खो दिया है, जिनका अनगिनत भारतीयों के दिलों में एक विशेष स्थान था।उनके प्रेरक व्यक्तित्व ने खुद को लाखों लोगों का प्रिय बना दिया। उनके निधन से आहत है।

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91 वर्षीय इस महान धावक मिल्खा सिंह कोरोना वायरस से संक्रमित होने के करीब एक महीने बाद निधन हो गया,चंडीगढ़ के पीजीआई अस्पताल में अंतिम सांस ली। मिल्खा 20 मई को कोरोना वायरस की चपेट में आए थे,

मिल्खा सिंह को पद्मश्री सम्मान से नवाजा जा चुका है। मिल्खा सिंह ने एशियाई खेलों में चार बार स्वर्ण पदक जीता 1958 राष्ट्रमंडल खेलों में भी पीला तमगा हासिल किया था। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हालांकि 1960 के रोम ओलंपिक में था जिसमें वह 400 मीटर फाइनल में चौथे स्थान पर रहे थे।मिल्‍खा सिंह ने 1956, 1960 और 1964 ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्‍व किया था.

1960 रोम ओलिंपिक में मिल्‍खा सिंह से हर किसी को उम्‍मीद थी कि मिल्‍खा गोल्‍ड मेडल जीतेंगे, मगर वो चौथे स्‍थान पर रहे. जबकि इस रेस में कई रिकॉर्ड टूट गए थे. वह सेकंड के कुछ हिस्‍से से ओलिंपिक मेडलिस्‍ट बनने से चूक गए. रोम ओलिंपिक में मिल्‍खा सिंह पांचवी हीट में दूसरे स्‍थान पर रहे थे.क्‍वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में भी दूसरे स्‍थान पर रहे थे.

1960 में 400 मीटर का फाइनल दो दिन बाद हुआ. इन दो दिनों में मिल्‍खा थोड़े से दबाव में भी आ गए थे. फाइनल रेस में कार्ल कॉफमैन पहली लेन, अमेरिका के ओटिस डेविस दूसरी लेन, मिल्‍खा सिंह पांचवीं लेन और जर्मनी का एथलीट छठी लेन पर थे.

मिल्‍खा करीब 200 मीटर तक लीड कर रहे थे. मगर तभी उनके मन में ख्‍याल आया कि वह काफी तेज दौड़ रहे हैं और हो सकता है कि वह रेस पूरा नहीं पाएं.काफी समय पहले एक टीवी इंटरव्‍यू में मिल्‍खा सिंह ने बताया था कि इसी वजह से उन्‍होंने अपनी गति को थोड़ा कम किया था और एक बार पीछे मुड़कर देख लिया था. इसके बाद उन्‍होंने देखा कि तीन चार खिलाड़ी उनसे आगे निकल गए हैं. उन्‍होंने उनसे आगे निकलने की कोशिश की, मगर तब बहुत देर हो गई थी.

 

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