रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय तटरक्षक बल के जवानों को वीरता और उत्कृष्ट सेवा पदक प्रदान किए

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 09 अक्टूबर, 2021 को नई दिल्ली में आयोजित एक सम्मान समारोह में भारतीय तटरक्षक बल (ICG) कर्मियों को वीरता और उत्कृष्ट सेवा पदक प्रदान किए। समारोह के दौरान तीन राष्ट्रपति तटरक्षक पदक (विशिष्ट सेवा), आठ तटरक्षक पदक (वीरता) और 10 तटरक्षक पदक (उत्कृष्ट सेवा) सहित कुल 21 पदक प्रदान किए गए। ये पदक आईसीजी के जवानों को उनकी निस्वार्थ सेवा, समर्पण, अनुकरणीय साहस और विषम परिस्थितियों में किए गए वीरतापूर्ण कार्यों के प्रति सम्मान में प्रदान किए गए।

इस अवसर पर समारोह को संबोधित करते हुए, राजनाथ सिंह ने विजेताओं को शुभकामनाएं दीं और विश्वास व्यक्त किया कि इन पुरस्कारों और पदकों से न केवल पुरस्कार विजेताओं का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि ये अन्य आईसीजी जवानों को भी राष्ट्र के हितों की रक्षा के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रेरित करेंगे। उन्होंने समुद्री सीमाओं की सुरक्षा बनाए रखने और देश के विशाल समुद्र तट को सुरक्षित रखने में आईसीजी के प्रयासों की सराहना की।

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रक्षा मंत्री ने उनकी ऊर्जा और समर्पण की सराहना करते हुए कहा, आईसीजी, जिसने सिर्फ चार-छह नौकाओं के साथ राष्ट्र के लिए अपनी सेवा शुरू की थी, अब 150 से अधिक जहाजों और 66 विमानों के साथ दुनिया की सबसे अच्छी समुद्री सेनाओं में से एक है। उन्होंने कहा कि तटरक्षक बल का लगातार बढ़ता कद लोगों में यह विश्वास जगाता है कि राष्ट्रीय समुद्री हितों की सुरक्षा सुरक्षित हाथों में हैं।

इस बात पर जोर देते हुए कि भारत की संस्कृति, साहित्य, व्यापार और अर्थव्यवस्था का समुद्र से गहरा संबंध है, श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि समृद्धि की संभावनाओं के साथ-साथ समुद्र ने विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों को भी पैदा किया है। उन्होंने देश की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के सरकार के संकल्प को दोहराया और इसे व्यापक आंतरिक और बाहरी सुरक्षा ढांचे का एक महत्त्वपूर्ण पहलू बताया। उन्होंने कहा, “भारत के समुद्री क्षेत्र सुरक्षित, संरक्षित और प्रदूषण मुक्त होने चाहिए। यह हमारी सुरक्षा जरूरतों को पूरा करेगा और पर्यावरणीय स्वास्थ्य और आर्थिक विकास सुनिश्चित करेगा।”

रक्षा मंत्री ने ‘निर्बाध समुद्री गतिविधि’ को तीव्र विकास के पथ पर आगे बढ़ने के लिए आवश्यक चीज बताया। उन्होंने कहा कि भारत एक उभरती हुई समुद्री शक्ति है और इसकी समृद्धि काफी हद तक समुद्र पर निर्भर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सागर’, यानी ‘क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास’ के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए, उन्होंने क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देकर, हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में समुद्री शांति बनाए रखने और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री एजेंसियों के साथ मिलकर काम करके उस लक्ष्य को हासिल करने में सबसे आगे रहने के लिए आईसीजी की सराहना की।

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राजनाथ सिंह ने पड़ोसी देशों को जरूरत पड़ने पर सहायता प्रदान करने के अपने वीरतापूर्ण कार्यों के लिए भी आईसीजी की प्रशंसा की। उन्होंने आईसीजी के अग्निशमन और प्रदूषण प्रतिक्रिया अभियानों- सागर रक्षा-I और सागर रक्षा-II का विशेष उल्लेख किया, जिसने हाल ही में श्रीलंका के तट पर बड़े कच्चे तेल वाहक जहाज ‘न्यू डायमंड’ और कंटेनर पोत ‘एक्सप्रेस पर्ल’ में लगी आग को बुझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि समय पर किए गए इन साहसी कार्यों ने आईओआर में बड़ी तबाही को टाल दिया और भारत को एक जिम्मेदार और सक्षम समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित किया है।

रक्षा मंत्री ने हाल ही में आए चक्रवात ‘ताउते’ और ‘यास’ के दौरान बहुमूल्य जीवन बचाने में आईसीजी द्वारा निभाई गई सराहनीय भूमिका को याद किया। उन्होंने अवैध हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ उनके अभियानों के लिए आईसीजी की प्रशंसा करते हुए कहा कि ‘समुद्र के प्रहरी’ न केवल वर्तमान की चुनौतियों से निपट रहे हैं, बल्कि देश के भविष्य को सुरक्षित और मजबूत करने के लिए भी काम कर रहे हैं।

पिछले एक साल में, आईसीजी ने 70 चिकित्सा निकासी अभियानों का संचालन किया, 555 खोज और बचाव अभियान चलाए और 1,090 से अधिक लोगों की जान बचाई।

इस अवसर पर आईसीजी के महानिदेशक श्री के नटराजन और रक्षा मंत्रालय एवं भारतीय तटरक्षक बल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित हुए।

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रक्षा मंत्री ने 38वें तटरक्षक कमांडरों के सम्मेलन को भी संबोधित किया

सम्मान समारोह के बाद, रक्षा मंत्री ने 38वें तटरक्षक कमांडरों के सम्मेलन को भी संबोधित किया। यह सम्मेलन एक वार्षिक कार्यक्रम है जिसमें आईसीजी और रक्षा मंत्रालय के सभी वरिष्ठ अधिकारी भाग लेते हैं। रक्षा मंत्री को भारतीय तटरक्षक बल में हाल के परिचालन संबंधी और प्रशासनिक घटनाक्रम पर एक संक्षिप्त जानकारी दी गई। तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान आईसीजी को मजबूत बनाने के साथ-साथ महासागरों के वैध उपयोग से संबंधित कई मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

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