भारत और ब्रिटेन ने भारतीय छात्रों के लिए शैक्षिक अवसर बढ़ाने को लेकर एक समझौता ज्ञापन पर किया हस्ताक्षर

भारत-ब्रिटेन व्यापार वार्ता सही दिशा में है। ब्रिटेन के साथ दो समझौता ज्ञापनों और एक फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद मीडिया से बात करते हुए, वाणिज्य सचिव बी. वी. आर. सुब्रह्मण्यम ने कहा कि भारत-ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) वार्ता 31 अगस्त तक समाप्त हो जाएगी और दोनों पक्षों की आंतरिक मंजूरी के बाद दोनों नेताओं की सहूलियत के अनुसार समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकेंगे। उन्होंने कहा, “ब्रिटेन की सत्ता में अलग पार्टी के होने के बावजूद, भारत के साथ एफटीए की तार्किकता में कोई अंतर नहीं हुआ है।”

इससे पूर्व, भारत की ओर से भारत सरकार के वाणिज्य सचिव श्री बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम और ब्रिटेन की ओर से ब्रिटेन के अंतरराष्ट्रीय व्यापार विभाग के स्थायी सचिव श्री जेम्स बॉलर ने मैरिटाइम शिक्षा सहित शैक्षिक योग्यता की पारस्परिक मान्यता पर दो समझौता ज्ञापनों और स्वास्थ्य देखभाल कार्य बल पर एक फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों से भारत और ब्रिटेन के बीच शिक्षा के क्षेत्र में निकट तालमेल कायम करने में आसानी होगी, अल्पकालिक द्विपक्षीय आवाजाही बढ़ेगी और योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता सुनिश्चित होगी।

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ये समझौते दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा 4 मई, 2021 को शुरू की गई वृहद् व्यापार साझेदारी (एन्हांस्ड ट्रेड पार्टनरशिप) (ईटीपी) के तहत दोनों पक्षों द्वारा की गई प्रतिबद्धताओं का हिस्सा हैं, ताकि 2030 तक प्रमुख क्षेत्रों में व्यापार को दोगुना करके और बाजार की बाधाओं को कम करके व्यापार साझेदारी का लाभ प्राप्त किया जा सके। ईटीपी के शुभारंभ के बाद, दोनों पक्षों ने 13 जनवरी, 2022 को एक मुक्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत शुरू की थी। फिलहाल भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में 5वें दौर की वार्ता चल रही है। बैठक के दौरान एफटीए पर हस्ताक्षर की दिशा में हुई प्रगति का भी जायजा लिया गया।

भारत सरकार की ओर से उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री के. संजय मूर्ति द्वारा शिक्षा पर आधारित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता ज्ञापन दोनों देशों में विधिवत अनुमोदित और मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षा संस्थानों के भीतर छात्रों द्वारा प्राप्त शैक्षिक योग्यता और अध्ययन की अवधि की पारस्परिक मान्यता प्रदान करता है। पारस्परिक आधार पर, भारतीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय/पूर्व-विश्वविद्यालय प्रमाणपत्रों को ब्रिटेन के उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए उपयुक्त माना जाएगा। इसी तरह, भारत और ब्रिटेन की स्नातक डिग्री, स्नातकोत्तर डिग्री और डॉक्टरेट की डिग्री को भी एक-दूसरे के समकक्ष माना जाएगा। एक दूसरे देश में छात्रों की आवाजाही को बढ़ावा देने के अलावा, योग्यता की पारस्परिक मान्यता होने से सहयोग, अकादमिक और अनुसंधान के क्षेत्र में आदान-प्रदान के माध्यम से उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता को भी बढ़ावा मिलेगा।

भारत सरकार की ओर से नौवहन महानिदेशक श्री अमिताभ कुमार ने मैरिटाइम शिक्षा योग्यता पर आधारित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता ज्ञापन दोनों सरकारों के लिए एक दूसरे द्वारा जारी मैरिटाइम शिक्षा और प्रशिक्षण, योग्यता और नाविकों के समर्थन के प्रमाणपत्रों को पारस्परिक रूप से मान्यता देने का मार्ग प्रशस्त करेगा। समझौता ज्ञापन दोनों देशों के नाविकों के रोजगार के लिए फायदेमंद साबित होगा और उन्हें किसी भी पक्ष के जहाजों पर रोजगार के लिए योग्य बनाएगा। भारत प्रशिक्षित नाविकों के बड़े पूल के साथ नाविक उपलब्ध करने वाला एक देश होने के नाते, इसे समझौता ज्ञापन से महत्वपूर्ण रूप से लाभान्वित होने की उम्मीद है।

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भारत की ओर से, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री वी. हेकाली झिमोमी द्वारा हेल्थकेयर वर्कफोर्स पर फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते में नर्सिंग और संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों (एएचपी) पर सहयोग, स्वास्थ्य पेशेवरों के प्रशिक्षण और कौशल की कमी को दूर करने के उपाय शामिल हैं। यह समझौता ब्रिटेन द्वारा भारत से नर्सों और एएचपी की भर्ती और प्रशिक्षण को सुव्यवस्थित तरीके से सुगम बनाएगा। ब्रिटेन में नर्सों की कमी को ध्यान में रखते हुए इस समझौते से दोनों पक्षों को फायदा होगा।