गोरखपुर में महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय का राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया शिलान्यास

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गोरखपुर में आज महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय का  शिलान्यास किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहे।  महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय परिसर में आयुर्वेद, योग व प्राकृतिक चिकित्सा का एक उत्कृष्ट श्रेणी का शोध संस्थान भी स्थापित होगा, जिसमें अन्तर्विभागीय चिकित्सा पद्धतियों का पारस्परिक समन्वय करते हुए शोध कार्यों को बढ़ावा दिया जाएगा।

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महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना एवं संचालन के लिए जिला गोरखपुर में 52 एकड़ भूमि में बनाया जायेगा  इस विश्वविद्यालय के भवन निर्माण की अनुमानित लागत 300 करोड़ रुपये तैयार होगा महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय, गोरखपुर से राज्य में संचालित समस्त आयुष, आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, योग व प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान और महाविद्यालयों एवं शिक्षा संस्थानों को इस विश्वविद्यालय से जोड़ा जाएगा। आयुष महाविद्यालयों की प्रवेश प्रक्रिया, सत्र-नियमन, परीक्षा-संचालन व परिणाम में एकरूपता स्थापित होगी। इस विश्वविद्यालय में पैरामेडिकल, नर्सिंग, फॉर्मेसी एवं आरोग्यता से जुड़े सभी पाठ्यक्रमों के निर्माण एवं अध्ययन, अध्यापन, शोध की व्यवस्था रहेगी। वहीं, रोजगार के लिए तकनीकी पाठ्यक्रमों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भारत का गौरवशाली इतिहास रहा है। तक्षशिला में दुनिया के पहले विश्वविद्यालय से नालंदा, उदंतपुरी, विक्रमशिला और वल्लभी विश्वविद्यालयों तक, परंपरा कुछ समय के लिए फीकी पड़ गई थी। लेकिन, हमारे वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और शिक्षकों ने अपनी बुद्धि और समर्पण से दुनिया को लगातार प्रभावित किया है। उन्होंने हम सभी में यह विश्वास जगाया है कि हमारे छात्र ज्ञान की हमारी प्राचीन परंपरा को आगे बढ़ाने में सक्षम हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय ऐसे ज्ञानवान छात्रों को तैयार करेगा जो आत्मनिर्भर, मजबूत और स्वस्थ भारत के निर्माण में योगदान देंगे।

 

राष्ट्रपति  राम नाथ कोविंद ने कहा कि कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई मे विशेष रूप से महामारी के प्रकोप की दूसरी लहर में, आयुष चिकित्सा प्रणाली ने लोगों की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने यह बात आज 28 अगस्त, 2021 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय की आधारशिला रखने के अवसर पर कही।

राष्ट्रपति द्वारा नींव रखे जाने के बाद वहां बारिश हुई। राष्ट्रपति ने इसे परियोजना के लिए शुभ संकेत बताया।

सभा को संबोधित करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे देश में प्राचीन काल से स्वास्थ्य और उपचार की कई पारंपरिक और गैर-पारंपरिक प्रणालियां प्रचलित हैं। भारत सरकार ने इनके विकास के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। चिकित्सा की इन प्रणालियों की व्यवस्थित शिक्षा और अनुसंधान के लिए, 2014 में आयुष मंत्रालय का गठन किया गया था। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 2017 में आयुष विभाग की भी स्थापना की थी। उन्होंने विश्वास जताया की महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ, प्रदेश के आयुष चिकित्सा संस्थान इस विश्वविद्यालय से संबद्ध होकर अपने-अपने क्षेत्र में बेहतर कार्य कर सकेंगे।

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राष्ट्रपति ने कहा कि यह विश्वविद्यालय समय की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए योग, आयुर्वेद, चिकित्सा शिक्षा, उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा आदि पाठ्यक्रमों के अलावा रोजगार सृजन पाठ्यक्रम संचालित करेगा। यह विश्वविद्यालय उच्च स्तरीय अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ छात्रों के लिए व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास पाठ्यक्रम संचालित करेगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में यह परिकल्पना की गई है कि शिक्षा चरित्र निर्माण करे। शिक्षा से छात्रों में नैतिकता, तार्किकता, करुणा और संवेदनशीलता का विकास करने के साथ-साथ उन्हें रोजगार के योग्य बनाना चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का एक उद्देश्य हमारे संस्थानों के पाठ्यक्रम और शिक्षाशास्त्र में सुधार करना है और साथ ही बदलती दुनिया में नागरिकों के रूप में उनके मौलिक कर्तव्यों और संवैधानिक मूल्यों के साथ-साथ उनकी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के बारे में छात्रों के बीच जागरूकता पैदा करना है।

राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा के प्रसार के माध्यम से सामाजिक उत्थान के लक्ष्य के साथ 1932 में स्थापित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद, उत्तरी भारत में विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश में लगभग 50 शिक्षण संस्थान चला रही है। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि इन संस्थानों में आधुनिक शिक्षा प्रदान करने के अलावा छात्रों के व्यक्तित्व के समग्र विकास पर जोर दिया जा रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि गोरक्षपीठ सदियों से भारत के सामाजिक-धार्मिक जागरण में प्रमुख भूमिका निभा रहा है। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस पीठ ने राजनीतिक जागृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। श्री गोरक्षपीठ वर्तमान में भी जन जागरूकता, जनसेवा, शिक्षा और चिकित्सा सेवा का केन्द्र बना हुआ है।