रक्षाबंधन पर्व के लिए ये महिलायें देशी पेड़ों के बीज से,बना रही हैं राखी

रक्षाबंधन पर्व के लिए औरंगाबाद की महिला किसान मंच की 1100 जनजातीय महिलाएं रक्षा बंधन के लिए देशी पेड़ों के बीज से राखी बना रही हैं। देशी पेड़ों के बीज से बनी राखी एक बार के उपयोग के बाद बीज मिट्टी में बोए जा सकते हैं। इससे पर्यावरण को लाभ मिलता है और परियोजना से जुड़ी जनजातीय महिलाओं को रोजगार मिलता है।

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने एक अनूठी पहल करते हुए आर्ट ऑफ लीविंग की साझेदारी में महाराष्ट्र के औरंगाबाद में वृक्ष बंधन परियोजना लॉन्च की।रक्षा बंधन के लिए देशी पेड़ों के बीज से बनी राखियां प्राकृतिक रूप से रंगे, नरम स्वदेशी, गैर विषैले, बायोडिग्रेडेबल कपास पर चिपके देशी बीजों से बनती हैं। राखी के उपयोग के बाद बीज मिट्टी में बोए जासकते हैं इस परियोजना के अंतर्गत हजारों पेड़ लगाए जाने की उम्मीद है यह वन क्षेत्र बढ़ाने तथा जलवायु परिवर्तन से निपटने में अनोखा योगदान है। इस परियोजना के अंतर्गत हजारों पेड़ लगाए जाने की उम्मीद है,

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जनजातीय कार्य मंत्रालय ने परियोजना को आकर्षक बनाने के लिए वर्चुअल समारोह का आयोजन किया जिसमें आर्ट ऑफ लीविंग के श्री श्री रविशंकर भी उपस्थित थे। आदिवासी किसान महिला मंच की महिलाओं ने बीज से बनी राखी के कई नमूने दिखाए और राखी बनाने की प्रक्रिया की भी जानकारी दी।

जनजातीय कार्य मंत्रालय की ओर से वर्चुअल समारोह में संयुक्त सचिव डॉ. नवल जीत कपूर तथा संयुक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार सुश्री यतिंदर प्रसाद शामिल हुए। इस अवसर पर डॉ. कपूर ने कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत, जनजातीय किसानों में आत्मनिर्भरता की भावना जागृत करने के विजन से जुड़ी हुई है। गौ आधारित परंपरागत खेती संबंधी परियोजना का उद्देश्य जनजातीय समुदायों के परंपरागत पारिस्थितिकीय ज्ञान का संरक्षण करना और पुनर्जीवित करना तथा रासायनिक कृषि के नकारात्मक प्रभाव से उनकी रक्षा करना है।

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Himalayan women lifestyle Uttarakhand India | पहाड़ों की महिलाएं कैसे काम करती

 

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