विश्व शेर दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी ने शेरों के संरक्षण के लिये जुनूनी सभी लोगों को दी बधाई

हर साल 10 अगस्त को विश्व शेर दिवस मनाया जाता है।इस दिन शेरों को लेकर लोगों के मन में जागरूकता बढ़ाने और शेरों की घटती आबादी और संरक्षण पर जोर दिया जाता है।मुगलकालीन पीरियड से लेकर ब्रिटिश काल तक इनका व्यापक स्तर पर शिकार किया गया, जिसके फलस्वरूप ये भारत के अधिकतर क्षेत्रों से शेर लुप्त हो गए.पिछले कुछ सालों से शेरों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है जो कि काफी ख़ुशी की बात है.

यदि हम प्राचीन भारतीय इतिहास के साहित्य, पेंटिंग और राजस्व रिकॉर्ड  को देंखें तो एशियाई शेर, इंडो-गंगाटिक प्लेन में सिंध से लेकर पश्चिम में बिहार तक शेर पाए जाते थे,उस समय इनका व्यापक स्तर पर शिकार किया गया, जिसके कारण ये भारत के अधिकतर क्षेत्रों से लुप्त हो गए, भारत में रहने वाली शेर पांच पंथेरायन कैट्स में से एक है, जिसमें बंगाल टाइगर, भारतीय तेंदुआ, हिम तेंदुए भी शामिल हैं.शेर का शिकार का समय अधिकतर रात में और सुबह में होता है यह एक सप्ताह तक भी बिना शिकार के रह सकता है।शेर 2-4 दिन में शिकार करता है, एशियाई शेर 2-2.5 मीटर लंबा और इसका वजन 115-200 किलोग्राम होता है और यह छोटी दूरी में 65 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से अपने शिकार का पीछा कर सकता है.

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व शेर दिवस पर उन सभी लोगों को बधाई दी है, जिनमें शेरों के संरक्षण के लिये जुनून है।

अपने कई ट्वीटों में प्रधानमंत्री ने कहा हैः

“शेर राजसी ठाठ-बाट वाला और साहसी होता है। भारत को एशियाई शेरों का घर होने पर गर्व है। विश्व शेर दिवस पर, मैं शेर संरक्षण के प्रति सभी उत्साही लोगों को बधाई देता हूं। आपको यह जानकर खुशी होगी कि पिछले कुछ वर्षों में भारत में शेरों की तादाद में लगातार वृद्धि हुई है।

जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था, तब मुझे गिर के शेरों के प्राकृतिक वास और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये काम करने का अवसर मिला था। इसके लिये कई पहलें की गई थीं, जिनमें स्थानीय समुदायों को भी शामिल किया गया था। शेरों के प्राकृतिक वास की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये दुनिया भर में अपनाये जाने वाले बेहतरीन तरीकों को इस्तेमाल किया गया। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिला।”

Documentary film

Village Life in Uttarakhand India part 3