94 वर्षीय पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा का कोरोना से हुआ निधन,

चिपकोआंदोलन के प्रणेता 94 वर्षीय सुन्दरलाल बहुगुणा ने आज 21मई उत्तराखंड एम्स ऋषिकेश में आखरी सांसें ली, सुंदरलाल बहुगुणा 9 मई को कोरोना संक्रमण के चलते ऋषिकेश एम्स में हुए थे भर्ती,जहां उनका ईलाज चल रहा था।पर्यावरण को स्थाई सम्पति माननेवाला यह महापुरुष आज अलबिदा कह गये,

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सुंदर लाल बहुगुणा का जन्म 9 जनवरी 1927 को उत्तराखंड के टिहरी जिले में हुआ था। यहीं उनकी प्राथमिक शिक्षा हुई और 18 साल की उम्र में आगे की पढ़ाई के लिए लाहौर चले गए। लाहौर से लौटने के बाद उनका विवाह विमला देवी के साथ हुआ। फिरउन्होंने गांव में ही रहने का फैसला किया। 1970 में पर्यावरण सुरक्षा के लिए उन्होंने आंदोलन का बिगुल फूका,आंदोलन पूरे भारत में फैलने लगा। चिपको आंदोलन भी उसी का एक हिस्सा था। जिसने 1972 में चिपको आंदोलन को धार दी। देश और दुनिया को वनों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया। आंदोलन की गूंज समूची दुनिया में सुनाई पड़ी।
सुन्दरलाल बहुगुणा कहते थे पेड़ों को काटने की अपेक्षा पेड़ों को लगाना अति महत्वपूर्ण है। बहुगुणा के कार्यों से प्रभावित होकर अमेरिका की फ्रेंड ऑफ नेचर नामक संस्था ने1980 में इनको पुरस्कृत भी किया। इसके अलावा उन्हें कई सारे पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा के निधन पर uttrakhand के राज्यपाल बेबी रानी मौर्य, मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत,विधान सभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल,नेता प्रतिपक्ष इंद्रा हृदेश,समाज सेवा एवं हंस फाउंडेशन के संस्थापक माता मंगला जी एवं श्री भोले जी महाराज ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे देश की अपूरणीय क्षति बताया है।

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