हिंदी दिवस – 2021 समारोह में बोले अमित शाह, प्रधानमंत्री दुनिया के उच्च से उच्च अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी हिंदी में बोलते हैं तो हमें किस चीज का संकोच है

हिंदी दिवस – 2021 समारोह में बोले अमित शाह, प्रधानमंत्री दुनिया के उच्च से उच्च अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी हिंदी में बोलते हैं तो हमें किस चीज का संकोच है

विज्ञान भवन में आयोजित हिंदी दिवस – 2021 समारोह में केन्द्रीय गृह और सहकारिता मंत्री, अमित शाह आज मुख्य अतिथि के रूप में
में शामिल हुए। इस अवसर पर अमित शाह ने वर्ष 2018-19, 2019-20 और 2020-21 के दौरान राजभाषा हिंदी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले मंत्रालयों, विभागों उपक्रमों आदि को राजभाषा कीर्ति और राजभाषा गौरव पुरस्कार भी प्रदान किया। केन्द्रीय गृह और सहकारिता मंत्री ने राजभाषा भारती पुस्तिका के 160वें अंक का विमोचन भी किया। इस अवसर पर केन्द्रीय गृहराज्य मंत्री, नित्यानंद राय, अजय कुमार मिश्रा और निशिथ प्रामाणिक, केन्द्रीय गृह सचिव, राजभाषा विभाग के सचिव और भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों सहित कई गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

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हिंदी दिवस – 2021 अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि हमने जब संविधान को स्वीकारा, इसके साथ ही 14 सितंबर 1949 के एक निर्णय को भी स्वीकार किया कि इस देश की राजभाषा हिंदी होगी और लिपि देवनागरी होगी। अमित शाह ने कहा कि ये जो पुरस्कार होता है, वो कई लोगों को प्रेरणा देता है और राजभाषा को बढावा देने के लिए आगे बढ़ने का हौसला देता है। उन्होंने ग़ैर-हिंदी पुरस्कार विजेताओं को विशेष बधाई देते हुए कहा कि आप जिस प्रदेश से आते हो, उस प्रदेश की भाषा के साथ-साथ राजभाषा को भी उस प्रदेश में पहुँचाने का आपने बहुत अच्छा काम किया है। उन्होंने कहा कि हिंदी का किसी स्थानीय भाषा से कोई मतभेद नहीं है और हिंदी भारत की सभी भाषाओं की सखी है और यह सहअस्तित्व से ही आगे बढ़ सकती है।

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज़ादी की लड़ाई में स्वदेशी, स्वभाषा और स्वराज, इन तीन शब्दों ने बहुत बड़ा योगदान दिया और ये आज़ादी की लड़ाई के तीन मूल स्तंभ थे। प्रधानमंत्री जी ने स्वदेशी को आगे बढ़ाने के लिए आत्मनिर्भर भारत का बहुत बड़ा अभियान छेड़ा है। स्वभाषा को मजबूत करने का काम हम सबने मिलकर, विशेषकर देश की नई पीढ़ी ने किया है। उन्होंने कहा कि अब कोई संकोच रखने की ज़रूरत नहीं है, देश के प्रधानमंत्री दुनिया के उच्च से उच्च अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी हिंदी में बोलते हैं, अपनी भाषा में बोलते हैं, तो हमें किस चीज का संकोच है। शाह ने कहा कि वो जमाना गया जब हिंदी बोलते थे तो होता था कि किस प्रकार से सामने वाला व्यक्ति मेरा मूल्यांकन करेगा। आपका मूल्यांकन आपके कामों के आधार पर ही होगा, आपकी क्षमताओं के आधार पर ही होगा, भाषा के आधार पर नहीं होगा।

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