भारत ने अमेरिका के पिट्सबर्ग में आयोजित ग्लोबल क्लीन एनर्जी ऐक्शन फोरम-2022 में इनोवेशन रोड-मैप ऑफ दी मिशन इंटीग्रेटेट बायो-रीफायनरीज़ के आरंभ की घोषणा

डॉ. जितेन्द्र सिंह इस समय विद्युत, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक उच्चस्तरीय संयुक्त भारतीय मंत्री स्तरीय प्रतिनिधमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने अमेरिका के पेनसिल्वेनिया स्थित पिट्सबर्ग में आयोजित ग्लोबल क्लीन एनर्जी ऐक्शन फोरम (वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा कार्यवाही मंच) में ब्राजील, कनाडा, ईसी और यूके से मिले नतीजों और निष्कर्षों के आधार पर विकसित “इनोवेशन रोड-मैप ऑफ दी मिशन इंटीग्रेटेट बायो-रीफायनरीज़” (मिशन आधारित जैव-परिशोधन की नवोन्मेषी रूपरेखा) की शुरूआत की घोषणा की।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि मिशन का लक्ष्य सार्वजनिक-निजी निवेश के जरिये अगले पांच वर्षों के दौरान ऊर्जा अनुसंधान, विकास और कार्यप्रणाली (आरडी-एंड-डी) में वित्तपोषण बढाने के लिये अधिक अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्राप्त करना है, ताकि इस लक्ष्य को पूरा करने की तथा सार्वजनिक व निजी निवेश के रचनात्मक चक्र की शुरूआत हो सके। ग्लोबल क्लीन एनर्जी ऐक्शन फोरम में “सस्टेनेबल बायो-एनर्जी एंड बायो-रीफायनरीज़” के पहली गोलमेज चर्चा में बोल रहे थे। यह फोरम सातवें मिशन इनोवेशन और 13वें क्लीन एनर्जी मिनिस्टीरियल-2022 का संयुक्त सम्मेलन है।

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डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि “इनोवेशन रोडमैप ऑफ दी मिशन इंटीग्रेटेड बायो-रीफायनरीज़” का लक्ष्य है कि मौजूदा जैव-परिशोधक मूल्य श्रृंखलाओं में खामियों तथा चुनौतियों की पहचान करके उसका समाधान किया जाये, मिशन को सहयोग देने के लिये आठ प्रमुख कार्यों को प्राथमिकता दी जाये तथा इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये मिशन को सही दिशा दी जाये। उन्होंने कहा कि इससे नीति-निर्माताओं को रणनीतिक प्रारूप भी मिलता है, ताकि वे अगले पांच वर्षों में अनुसंधान और विकास की दिशा में अग्रसर हो सकें। इसके अलावा महत्त्वपूर्ण जैव-परिशोधक प्रौद्योगिकियों के पूरे परिवेश के वित्तपोषण के प्रस्तावों को तैयार करने में सुविधा हो तथा कार्रवाई तेजी से चलाने के सुझाव मिल सकें।

मंत्रियों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, अमेरिका के ऊर्जा विभाग, मिशन नवाचार संचालन समिति और मिशन नवाचार सचिवालय के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, एमआई सदस्य देशों और साझेदार संगठनों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुये डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा बैठक भारत को यह अवसर देती है कि वह विश्व के सामने जलवायु तथा स्वच्छ ऊर्जा के बारे में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना को प्रस्तुत कर सके। डॉ. सिंह ने कहा कि इस बैठक में सम्मिलित होते हुये उन्हें बहुत हर्ष हो रहा है, जहां पूरा वैश्विक ऊर्जा समुदाय वैश्विक हरित संक्रांति की तरफ कदम बढ़ाने और एक-दूसरे के साथ सहयोग करने के लिये एकजुट हुआ है।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने प्रतिनिधियों को बताया कि भारत लगातार अपने ऊर्जा परिदृश्य को बदलने का काम कर रहा है, जिसमें स्वच्छ ऊर्जा का हिस्सा बहुत बड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत इस बात पर राजी है कि वह 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल कर लेगा, 50 प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकता नवीकरणीय ऊर्जा से पूरी करेगा, एक अरब टन तक कुल अपेक्षित कार्बन उत्सर्जन को प्राप्त करेगा, 2005 के स्तर के मद्देनजर अर्थव्यवस्था में कार्बन खपत को 45 प्रतिशत तक कम करेगा तथा 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन अर्जित कर लेगा।

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डॉ. जितेन्द्र सिंह ने गर्व से यह बात साझा की कि एकीकृत एनजाइम उत्पादन युक्त 10 टन/प्रति दिन क्षमता वाले संयंत्र को प्रायोगिक तौर पर हरियाणा के पानीपत में स्थापित किया जा रहा है, जो दिसंबर 2022 तक काम करना चालू कर देगा। उन्होंने कहा कि यह मौके पर एनजाइम उत्पादन की पहली स्वदेशी प्रौद्योगिकी है। डॉ. सिंह ने कहा कि इंडियन ऑयल कारपोरेशन ने स्वदेशी एनजाइम की आपूर्ति को 100 किलोलीटर प्रति दिन का उत्पादन करने वाले वाणिज्यिक 2जी एथेनॉल संयंत्र को आपूर्ति करने की योजना बनाई है। आशा की जाती है कि यह संयंत्र 2024 की दूसरी तिमाही में चालू हो जायेगा। इसके अलावा अवशिष्ट लिगनिन (लकड़ी के रेशे) से मूल्य-संवर्धित उत्पाद विकिसत करने की प्रक्रिया भी चल रही है। उन्होंने कहा कि इसकी सफलता से स्वदेशी प्रौद्योगिकी आगे बढ़ेगी, आत्मनिर्भर भारत की दिशा में योगदान होगा तथा यातायात सेक्टर में कार्बन उत्सर्जन में कमी आयेगी।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि ग्रीन हाउस उत्सर्जन में कमी लाने के लिये सतत जैव-ईंधन प्रमुख भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि भारत अपने जैव-प्रौद्योगिकी विभाग के जरिये उन्नत जैव-ईंधन तथा री-साइक्लिंग के लिये अनुपयुक्त अपशिष्ट से ऊर्जा पैदा करने वाली प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और विकास नवाचार को समर्थन करता रहा है। उन्होंने प्रतिनिधियों को यह भी बताया कि भारत ने पांच जैव-ऊर्जा केंद्रों की स्थापना की है, जहां विभिन्न विषयों से सम्बंधित टीमें आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकीय साधनों से उन्नत व सतत जैव-ईंधन पर काम कर रही हैं।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने अंत में कहा कि हाल में जब भारत ने नई दिल्ली में एमआई वार्षिक समागम की मेजबानी की थी, तब नीदरलैंड्स से मिले निष्कर्षों के आधार पर मिशन एकीकृत जैव-परिशोधन की शुरूआत की गई थी, जिसके तहत प्रमुख सदस्य, अंतर्राष्ट्रीय संगठन, कारपोरेट सेक्टर, अकादमिक संस्थान और सिविल सोसायटी एकजुट हुये, ताकि कम कार्बन उत्सर्जन करने वाले भविष्य के लिये नवीकरणीय ईंधन, रसायनों और पदार्थों में नवाचार में तेजी लाई जा सके।

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