PM मोदी ने कहा पुलिस थाने से लेकर पुलिस हेडक्वार्टर की सीमाओं के भीतर ही नहीं सोचना है।

PM मोदी ने कहा पुलिस थाने से लेकर पुलिस हेडक्वार्टर की सीमाओं के भीतर ही नहीं सोचना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में आईपीएस प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाला 15 अगस्त स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ का शुभारंभ करेगा। पिछले 75 वर्षों में एक बेहतर पुलिस सेवा के निर्माण के प्रयास किए गए हैं। हाल के वर्षों में, पुलिस प्रशिक्षण से संबंधित बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है।

प्रधानमंत्री ने प्रशिक्षु अधिकारियों से स्वतंत्रता संग्राम की भावना का स्मरण रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 1930 से 1947 के बीच की अवधि में, हमारे देश की युवा पीढ़ी एक महान लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ी थी। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं के भीतर भी यही भावना अपेक्षित है। प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि “उन्होंने ‘स्वराज्य’ के लिए लड़ाई लड़ी; आपको ‘सुराज्य’ के लिए आगे बढ़ना होगा।”

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प्रधानमंत्री ने कहा  देश की सुरक्षा के लिए, कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए, आतंक को मिटाने के लिए हमारे पुलिस के साथी, अपनी जान तक न्योछावर कर देते हैं। कई-कई दिन तक आप घर नहीं जा पाते, त्योहारों में भी अक्सर आपको अपने परिवार से दूर रहना पड़ता है। लेकिन जब पुलिस की इमेज की बात आती है, तो लोगों का मनोभाव बदल जाता है। पुलिस में आ रही नई पीढ़ी का ये दायित्व है कि ये इमेज बदले, पुलिस का ये Negative Perception खत्म हो। ये आप लोगों को ही करना है।

आपकी ट्रेनिंग, आपकी सोच के बीच बरसों से चली आ रही पुलिस डिपार्टमेंट की जो स्थापित परंपरा है, उससे आपका हर रोज आमना-सामना होना ही होना है। सिस्टम आपको बदल देता है या आप सिस्टम को बदल देते हैं, ये आपकी ट्रेनिंग, आपकी इच्छाशक्ति औऱ आपके मनोबल पर निर्भर करता है।

आपके इरादे कोन से हैं। किन आदर्शो से आप जुड़े हुए हैं। उन आदर्शों की परिपूर्ति के लिए कौन संकल्प लेकर के आप चल रहे हैं। वो ही मेटर करता है आपके व्यवहार के बाबत में। ये एक तरह से आपकी एक और परीक्षा होगी। और मुझे भरोसा है, आप इसमें भी सफल होंगे, जरूर सफल होंगे।प्रधानमंत्री ने गांधी जी 1930 की दांडी यात्रा की याद दिलाते हुए कहा, गांधी जी कहा था कि “जब साधन न्यायपूर्ण और सही होते हैं तो भगवान भी साथ देने के लिए उपस्थित हो जाते हैं”।

देश के संविधान ने, देश के लोकतंत्र ने, जो भी अधिकार देशवासियों को दिए हैं, जिन कर्तव्यों को निभाने की अपेक्षा की है, उनको सुनिश्चित करने में आपकी भूमिका अहम है। औऱ इसलिए, आपसे अपेक्षाएं बहुत रहती हैं, आपके आचरण पर हमेशा नज़र रहती है। आप पर दबाव भी बहुत आते रहेंगे। आपको सिर्फ पुलिस थाने से लेकर पुलिस हेडक्वार्टर की सीमाओं के भीतर ही नहीं सोचना है। आपको समाज में हर रोल, हर भूमिका से परिचित भी रहना है, फ्रेंडली भी होना है और वर्दी की मर्यादाओं को हमेशा सर्वोच्च रखना है।

एक और बात का आपको हमेशा ध्यान रखना होगा। आपकी सेवाएं, देश के अलग-अलग जिलों में होंगी, शहरों में होंगी। इसलिए आपको एक मंत्र सदा-सर्वदा याद रखना है। फील्ड में रहते हुए आप जो भी फैसले लें, उसमें देशहित होना चाहिए, राष्ट्रीय परिपेक्ष्य होना चाहिए। आपके काम काज का दायरा और समस्याएं अक्सर लोकल होंगी, ऐसे में उनसे निपटते हुए ये मंत्र बहुत काम आएगा। आपको हमेशा ये याद रखना है कि आप एक भारत, श्रेष्ठ भारत के भी ध्वजवाहक है। इसलिए, आपके हर एक्शन, आपकी हर गतिविधि में Nation First, Always First- राष्ट्र प्रथम, सदैव प्रथम इसी भावना को रिफ्लेक्ट करने वाली होनी चाहिए।

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