कार्तिक महीना क्यों खास है हिंदू धर्म में-जाने जरूरी जानकारी

कार्तिक महीना का आध्यात्मिक महत्व

साल के 12 महीनों में कार्तिक महीना को आध्यात्मिक दृष्टि से पवित्र माह माना गया है, इस माह की पवित्रता की शुरूआत शरदपूर्णिमा से शुरु होती है और कार्तिकपूर्णिमा को समाप्त होता है। कार्तिक माह की पूर्णिमा को देव दीपावली भी कहते हैं।
इस महीने में दान, पूजा-पाठ तथा इस महीने के स्नान को कार्तिक स्नान भी कहते हैं जिसका बहुत महत्व माना गया है इस महीने सूर्योदय से पूर्व स्नान और पूजा-पाठ का खास महत्व होता है।

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कार्तिक महीना में प्रबोधिनी एकादशी महत्व

कार्तिक महीना की प्रबोधिनी एकादशी का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु आपनी चार महीने की निद्रा के पश्चात उठते हैं। इसी लिए इस दिन के बाद से सारे मांगलिक कार्य हो जाते हैं।
इस माह को आने वाली लगभग सभी तिथियों काअलग ही महत्व है लेकिन करवा चौथ , अहोई अष्टमी, रमा एकादशी, गौवत्स द्वादशी, धनतेरस, रूप चर्तुदशी, दीवाली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज, सौभाग्य पंचमी, छठ, गोपाष्टमी, आंवला नवमी, देव एकादशी, बैकुंठ चर्तुदशी, आदि इन तिथियों का सामाजिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण बिसेष महत्व होता है।कार्तिक माह कि देव उठनी या प्रबोधिनीएकादशी का भी विशेष आध्यात्मिक महत्व है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवानविष्णु चार महीनें की निद्रा के पश्चात जागृत होते हैं इसलिये प्रबोधिनीएकादशी के पश्चात से सारे मांगलिक कार्य शुरू किए जाते हैं।

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कार्तिक महीना का आध्यात्मिक महत्व

हिन्दू धर्म और शास्त्रों के अनुसार मान्यता है कि कार्तिक महीने में किया गया जप, दान, पूजा-.पाठ तथा पवित्र नदियों में सूर्योदय से पहले स्नान का बहुत ही महत्व होता है। ..कार्तिक माह में दीपदान का भी बिशेसविधान है, भक्त इन दिनों दीपकओं को लेकर मंदिरों पानी के स्रोतों घरों में नदियों के किनारे और पवित्र स्थानों आदि जगहों पर दीपक जलाते हैं

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कार्तिक महीना में तुलसी की पूजा का खास महत्व

कार्तिक महीने में तुलसी की पूजा का खास महत्व है। तुलसी जी भगवान विष्णु की प्रिय हैं इसलिये तुलसी की पूजा और आराधना करना बहुत फलदायी होता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि सुबह स्नान के बाद सूर्यभगवान और तुलसी को जल अर्पित करना विशेष फलदायी होता है तुलसी के पत्तों का उपयोग चरणामृत में भी किया जाता है इस महीने में तुलसी के पौधे रोपण और दान भी दिया जाता है। तुलसी के पौधे के पास सुबह.शाम दीया भी जलाया जाता है। अगर तुलसी का पौधा घर के बाहर होने के भी काफी फायदे हैं इस से किसी भी प्रकार का रोग तथा व्याधि घर में प्रवेश नहीं कर पाती हैं। तुलसी के पौधे से न केवल घर का वातावरण शुद्व होता है बल्कि रोग दूर होते हैं।

कार्तिक माह में श्रद्धालुओं के लिए परहेज

कार्तिक माह में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं को कुछ परहेज बताए गए हैं जिसका पालन करना चाहिए।
लहुसन, प्याज और मांसाहर का सेवन भी बिलकुल नही करना चाहिए।इस मास में धूम्रपान से भी दूर रहें । इन दिनों बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए जमीन पर सोना है इन दिनों भगवान सूर्य की उपासना करना विशेष फलदायी होता है। दोपहर के समय में सोना भी अच्छा नहीं माना गया है।
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