उत्तराखंड में जीतू बगडवाल नृत्य क्यों किया जाता है

जीतू बगडवाल

उत्तराखंड, में कदम कदम पर आपको कई कहानियां सुनने को मिलेंगी। अगर आप उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में जाएंगे तो यहां आपको जीतू बगड्वाल की कहानी बहुत सुनने को मिलेगी। गढ़वाल के लगभग हर गांव में जीतू बगड्वाल पांडव नृरित्या  कथाओं का मंचन किया जाता है।

जीतू बगडवाल की पौराणिक कहानी

पहाड़ों में बगडवाल नृत्य उत्तराखंड गांव की सांस्कृतिक परंपरा का विशेष महत्व है। यहां पर समय-समय पर पांडव नृत्य आदि का आयोजन होता रहता हैपौराणिक मान्यताओं के अनुसार गढ़वाल रियासत की गमरी पट्टी के बगोड़ी गांव पर जीतू का आधिपत्य था। अपनी तांबे की खानों के साथ उसका कारोबार तिब्बत तक फैला हुआ था। एक बार जीतू अपनी बहिन सोबनी को लेने उसके ससुराल रैथल पहुंचता है। हालांकि जीतू मन ही मन अपनी प्रेयसी भरणा से मिलना चाहता था। कहा जाता है कि भरणा अलौकिक सौंदर्य की मालकिन थी। भरणा सोबनी की ननद थी।

जीतू और भरणा के बीच एक अटूट प्रेम संबंध था या यूं कहें कि दोनों एक दूसरे के लिए ही बने थे। जीतू बांसुरी भी बहुत सुंदर बजाता थे किवदंती है कि जब धान की रोपाई के लिए जीतू बगड्वाल अपनी साली सोबनी को बुलाने जा रहा था तो उसकी मां उसे बताती है कि नीचे के रास्ते में जाते वक्त बांसुरी मत बजाना,

लेकिन इसके बावजूद जीतू ने बांसुरी बजानी शुरू की तो, वहां वन देवियां प्रकट हो गई। वे जीतू को मूर्छित करने लगी तो उसने उन्हें 9 गते अषाड़ को अपनी रोपाई के दिन आने का न्योता दिया।इसी दिन खेतों में रोपाई कर रहे जीतू को बैलों की जोड़ी सहित वन देवी अपने साथ ले जाती हैं,

https://livecultureofindia.com/जीतू-बगडवाल-नृत्य/ ‎

जीतू के जाने के बाद उसके परिवार पर आफतों का पहाड़ टूट पड़ा। बताया जाता है कि जीतू के भाई की साजिश के तहत हत्या हो जाती है। कहा जाता है कि इसके बाद जीतू अदृश्य रूप में परिवार की मदद करता है। तत्कालीन राजा को भी एहसास होता है कि जीतू एक अदृश्य शक्ति बनकर गांव की रक्षा कर रहा है। राजा ये सब कुछ भांपकर ऐलान करता है कि आज से जीतू को पूरे गढ़वाल में देवता के रूप में पूजा जाता है।  इसी मार्मिक कहानी को पहाड़ों में जीतू बगडवाल नृत्य के रूप में आयोजित किया जाता है।

कृपया हमारा यह ब्लॉग और वीडियो भी देखें

निरंकार भगवान की पूजा और कथा पौराणिक कथा

Baba Tungnath यात्रा की विडियो

श्री केदारनाथ को जागृत महादेव क्यों कहा जाता है

जीतू बगड़वाल प्रोग्राम के मुख्य आयोजक श्री जसपाल सिंह रावत कहते हैं कि गांव में रोजगार और सड़क न होने के कारण यहां का पलायन हो रखा है जिससे हमें इस प्रकार के प्रोग्राम को करने में काफी कठिनाई आती है समय पर लोग इकट्ठा नहीं हो सकते हैं,सरकारों ने गांव की ओर ध्यान नहीं दिया सरकार को गांव की ओर ध्यान देना पड़ेगा जिससे हमारी यह सांस्कृतिक परंपरा बची रहे,

जीतू बगडवाल से सम्बंदित विडियो देखें