प्राचीन हिंदू पुस्तकें एवं वेद के बारे में जानकारी-Information about Hindu books and Vedas

प्राचीन हिंदू पुस्तकें एवं वेद

हिन्दू धर्म के इतिहास की बात करें तो यह सबसे प्राचीन धर्मो में से एक है| हिन्दू धर्म का इतिहास वेदकाल से भी पहले का मिलता है, हिन्दू धर्म ग्रंथ ऋग्वेद’ को विश्व की प्रथम और सबसे प्राचीन माना गया है।इसे ही हम आज आप को हिन्दू धर्म के प्राचीन काल के ग्रन्थ और वेदों की कुछ महत्वपूर्ण पुस्तकों और उनके लेखकों या रचयिताओं के नाम बता रहे हैं

प्राचीन पुस्तकें

1-अष्टाध्यायी -पाणिनी
2-रामायण -वाल्मीकि
3-महाभारत -वेदव्यास
4-अर्थशास्त्र -चाणक्य
5-महाभाष्य -पतंजलि
6-सत्सहसारिका सूत्र -नागार्जुन
7-बुद्धचरित- अश्वघोष
8-सौंदरानन्द -अश्वघोष
9-महाविभाषाशास्त्र -वसुमित्र
10- स्वप्नवासवदत्ता -भास
11-कामसूत्र- वात्स्यायन
12-कुमारसंभवम् -कालिदास
13-अभिज्ञानशकुंतलम् -कालिदास
14-विक्रमोउर्वशियां -कालिदास
15-मेघदूत -कालिदास
16-रघुवंशम् -कालिदास
17-मालविकाग्निमित्रम् -कालिदास
18-नाट्यशास्त्र -भरतमुनि
19-देवीचंद्रगुप्तम -विशाखदत्त
20-मृच्छकटिकम्- शूद्रक
21-सूर्य सिद्धान्त -आर्यभट्ट
22-वृहतसिंता -बरामिहिर
23-पंचतंत्र। -विष्णु शर्मा
24-कथासरित्सागर -सोमदेव
25-अभिधम्मकोश -वसुबन्धु
26-मुद्राराक्षस -विशाखदत्त
27-रावणवध। -भटिट
28-किरातार्जुनीयम् -भारवि
29-दशकुमारचरितम् -दंडी
30-हर्षचरित -वाणभट्ट
31-कादंबरी -वाणभट्ट
32-वासवदत्ता -सुबंधु
33-नागानंद -हर्षवधन
34-रत्नावली -हर्षवर्धन
35-प्रियदर्शिका- हर्षवर्धन
36-मालतीमाधव -भवभूति
37-पृथ्वीराज विजय -जयानक
38-कर्पूरमंजरी -राजशेखर
39-काव्यमीमांसा -राजशेखर
40-नवसहसांक चरित -पदम् गुप्त
41-शब्दानुशासन -राजभोज
42-वृहतकथामंजरी -क्षेमेन्द्र
43-नैषधचरितम -श्रीहर्ष
44-विक्रमांकदेवचरित- बिल्हण
45-कुमारपालचरित- हेमचन्द्र
46-गीतगोविन्द -जयदेव
47-पृथ्वीराजरासो -चंदरवरदाई
48-राजतरंगिणी -कल्हण
49-रासमाला -सोमेश्वर
50-शिशुपाल वध -माघ
51-गौडवाहो -वाकपति
52-रामचरित -सन्धयाकरनंदी
53-द्वयाश्रय काव्य- हेमचन्द्र

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वेद

वेद को हिंदू धर्म का मूलाधार माना जाता है इसे सबसे प्राचीन ग्रंथों में से एक माना जाता है
वेद (4) चार है

1-ऋग्वेद
2-यजुर्वेद
3-सामवेद
4-अथर्ववेद

इन चार वेदों में ऋग्वेद को सबसे बड़ा वेद माना जाता है

वेदों के चार उपवेद है।

1- ऋग्वेद – आयुर्वेद
2- यजुर्वेद – धनुर्वेद
3 -सामवेद – गंधर्ववेद
4- अथर्ववेद – अर्थवेद

वेदों के 6अंग हैं ।

1 – शिक्षा
2 – कल्प
3 – निरूक्त
4 – व्याकरण
5 – छंद
6 – ज्योतिष

भगवान ने इन चार ऋषियों को वेदों का ज्ञान दिया

1- ऋग्वेद – अग्नि
2 – यजुर्वेद – वायु
3 – सामवेद – आदित्य
4 – अथर्ववेद – अंगिरा

वेदो के चार विषय हैं

1- ऋग्वेद – ज्ञान
2- यजुर्वेद – कर्म
3- सामवे – उपासना
4- अथर्ववेद – विज्ञान

ऋग्वेद में।
1- मंडल – 10
2 – अष्टक – 08
3 – सूक्त – 1028
4 – अनुवाक – 85
5 – ऋचाएं – 10589

यजुर्वेद में।
1- अध्याय – 40
2- मंत्र – 1975

सामवेद में।
1- आरचिक – 06
2 – अध्याय – 06
3- ऋचाएं – 1875

अथर्ववेद में।
1- कांड – 20
2- सूक्त – 731
3 – मंत्र – 5977

वेद-ज्ञान के सहायक दर्शन-शास्त्र और उनके लेखकों नाम इस प्रकार हैं

1- न्याय दर्शन – गौतम मुनि।
2- वैशेषिक दर्शन – कणाद मुनि।
3- योगदर्शन – पतंजलि मुनि।
4- मीमांसा दर्शन – जैमिनी मुनि।
5- सांख्य दर्शन – कपिल मुनि।
6- वेदांत दर्शन – व्यास मुनि।

उपनिषदों के विषय को वेदों से लिया गया है उपनिषदे ग्यारह प्रामाणिक है

01-ईश ( ईशावास्य )
02-केन
03-कठ
04-प्रश्न
05-मुंडक
06-मांडू
07-ऐतरेय
08-तैत्तिरीय
09-छांदोग्य
10-वृहदारण्यक
11-श्वेताश्वतर ।
चार युग।
1- सतयुग – 17,28000 वर्षों के नाम ( सतयुग ) रखा है।
2- त्रेतायुग- 12,96000 वर्षों के नाम ( त्रेतायुग ) रखा है।
3- द्वापरयुग- 8,64000 वर्षों के नाम है।
4- कलयुग- 4,32000 वर्षों के नाम है।
कलयुग को 4,976 वर्ष अभी तक हो चुके है
4,27024 वर्षों का भोग होना है।

चार वर्ण।
1- ब्राह्मण
2- क्षत्रिय
3- वैश्य
4- शूद्र

पंच महायज्ञ
1- ब्रह्मयज्ञ
2- देवयज्ञ
3- पितृयज्ञ
4- बलिवैश्वदेवयज्ञ
5- अतिथियज्ञ

http://livecultureofindia                                                        शास्त्री विनीत शर्मा,एम. फिल