शिवलिंग की महत्ता उनकी रचना और रूपों का निर्माण

शिवलिंग की महत्ता उसकी रचना , दुर्लभता के साथ स्थापित स्थल पर निर्भर करती है । शिवलिंग के कई रूपों का निर्माण विभिन्न कालक्रमों मे हुआ है ।

प्रकृतिक रूप से नदी के बहाव से अद्भुत शिवलिंगों का निर्माण होता है।

नर्मदा जी मे पाये जाने वाले ‘वाणलिंग ‘ कंकर कंकर मे शँकर।

एकमुखी , चतुर्मुखी , पन्चमुखी , अष्टमुखी शिवलिंगों ।

स्वयंभू लिंग
देवर्षियों की तपस्या से प्रसन्न हो कर उनके समीप प्रकट होने के लिये पृथ्वी के अन्तर्गत बीजरूप से व्याप्त भगवान शिव वृक्षों के अँकुर की भाँति भूमि को भेद कर ‘ नाद ‘ लिंग के रूप मे व्यक्त होते हैं और स्वंय प्रगट होने के कारण ‘ स्वयंभू ‘ कहलाते हैं ।

बिन्दु लिंग
सोने या चाँदी के पात्र पर भूमि अर्थात वेदी पर अपने हाथ से लिखे शुद्ध प्रणवरूप लिंग मे भगवान शिव की प्रतिष्ठा और आवाहन् करने पर पूजा जाने वाला नाद लिंग – बिन्दु लिंग कहलाते हैं।

इन्हें भी पढ़ें-

सावन को सबसे पवित्र महीना क्यों कहा गया जानिए

अपने घर के मंदिर में पूजा और ध्यान रखने वाली जरूरी बातें

लौंग के फायदे | 14 Benefits Of Cloves

Deepawali 2021 | दीपावली कब है | दिवाली में लक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त

इनमें स्थावर और जंगम दो भेद हैं ।

प्रतिष्ठित लिंग
देवताओं और ऋषियों द्वारा आत्मसिद्घि के लिये वैदिक मन्त्रो के उच्चारण पूर्वक अपने हाथ से शुद्ध भावनापूर्वक पौरुष लिंग ही ‘प्रतिष्ठित लिंग’कहलाते हैं ।

चर लिंग
लिंग , नाभि , जिह्वा , नासाग्र भाग , शिखा के क्रम मे कटि , हृदय , और मस्तिष्क मे की गयी लिंग की भावना ही ‘ अध्यात्मिकता ‘ है और यही चर लिंग कहलाते हैं ।

गुरु लिंग
गुरु मे शिव भावना करना तथा उनके निर्देश से पूजन के लिये अस्थायी रूप से मिट्टी से बनाया हुआ लिंग , जिसे पूजन पश्चात विसर्जित किया जाता है ‘ गुरु लिंग ‘ कहलाते हैं ।

“शिव: काशी शिव: काशी काशी शिव: शिव:।
ये जपन्ति नरा भक्त्या तेषां मुक्तिर्न संशयः।।”

आचार्य पंकज पुरोहित

 

Documentary film

koteshwar mahadev शिव गुफा रुद्रप्रयाग Uttarakhand.

Leave a Reply