श्रावण मास में भगवान शिव पूजन का पौराणिक महत्व

श्रावण मास में भगवान शिव पूजन का महत्व

हिन्दू सनातन धर्म और संस्कृति में श्रावण मास को सर्वोत्तम मास भी कहा जाता है। इसे मास को भगवान शिव का महीना कहा गया है।
श्रावण मास को यह पौराणिक तथ्य बताते हैं कि सावन माह बहुत उत्तम है
1-मरकंडू ऋषि के पुत्र मारकण्डेय ने लंबी आयु के लिए सावन माह में ही महामृत्युंजय मंत्र के जप से घोर तप कर शिव की कृपा प्राप्त की थी, जिससे मिली मंत्र शक्तियों के सामने मृत्यु के देवता यमराज भी नतमस्तक हो गए थे।
श्रावण में महामृत्युंजय मंत्र के जप करने व मंत्र श्रवण करने का पुण्य अक्षय होता हैं|

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2-भगवान शिव को सावन का महीना प्रिय होने का अन्य कारण यह भी है कि भगवान शिव सावन के महीने में पृथ्वी पर अवतरित होकर अपने ससुराल गए थे और वहां उनका स्वागत अर्घ्य और जलाभिषेक से किया गया था। माना जाता है कि प्रत्येक वर्ष सावन माह में भगवान शिव अपनी ससुराल आते हैं। भू-लोक वासियों के लिए शिव कृपा पाने का यह उत्तम समय होता है। श्रावण मास मैं शिव रुद्र अभिषेक करने से उत्तम व सहस्त्र गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती हैं व सम्पूर्ण मनोकामना सिद्ध होती हैं।
3- पौराणिक कथाओं में वर्णन आता है कि इसी सावन मास में समुद्र मंथन किया गया था। समुद्र मथने के बाद जो हलाहल विष निकला, उसे भगवान शंकर ने कंठ में समाहित कर सृष्टि की रक्षा की; लेकिन विषपान से महादेव का कंठ नीलवर्ण हो गया। इसी से उनका नाम ‘नीलकंठ महादेव’ पड़ा। विष के प्रभाव को कम करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने अभिषेक कर उन्हें जल व अन्य सामग्री अर्पित कि। इसलिए शिवलिंग पर जल दूध दही शर्करा घी तथा पंचामृत चढ़ाने का ख़ास महत्व है। यही वजह है कि श्रावण मास में अनेक सामग्रियों से शिव अभिषेक व जल चढ़ाने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
4- ‘शिवपुराण’ में उल्लेख है कि भगवान शिव स्वयं ही जल हैं। इसलिए जल से उनकी अभिषेक के रूप में अराधना का उत्तमोत्तम फल है, जिसमें कोई संशय नहीं है।
5- शास्त्रों में वर्णित है कि सावन महीने में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसलिए ये समय भक्तों, साधु-संतों सभी के लिए अमूल्य होता है। यह चार महीनों में होने वाला एक वैदिक यज्ञ है, जो एक प्रकार का पौराणिक व्रत है, जिसे ‘चौमासा’ भी कहा जाता है; तत्पश्चात सृष्टि के संचालन का उत्तरदायित्व भगवान शिव ग्रहण करते हैं। इसलिए सावन के प्रधान देवता भगवान शिव बन जाते हैं।

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