सावन को सबसे पवित्र महीना क्यों कहा गया जानिए

सावन सब से पवित्र महीना

हिन्दू सनातन धर्म और संस्कृति में माह  सावन को सबसे पवित्र महीने का दर्जा हासिल है। इसे भगवान शिव  Bhole Baba का महीना कहा गया है।

शास्त्रों के अनुसार प्राचीन काल में देवों और असुर योद्धाओं,समुद्र-मंथन का संयुक्त अभियान सावन के महीने में ही आरंभ किया था। धर्म ग्रंथों के अनुसार, एक बार महर्षि दुर्वासा के श्राप के कारण स्वर्ग श्रीहीन (ऐश्वर्य, धन, वैभव आदि) हो गया था और इन्द्र सहित सारे देवता शक्तिहीन हो गए थे,https://livecultureofindia.com/सावन-को-सबसे-पवित्र-महीना/

ऐसे में सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में गए, भगवान विष्णु ने देवताओं को असुरों के साथ मिलकर समुद्र मंथन करने का उपाय बताया और यह भी बताया कि समुद्र मंथन से अमृत की प्राप्ति होगी, जिसे पीकर आप सब अमर हो जाएंगे

समुद्र से 14 रत्न निकले समुद्र मंथन से सबसे पहले विष निकला, जिसकी ज्वाला बहुत तीव्र थी। सृष्टि को इस विष के घातक प्रभाव से बचाने के लिए देवों और असुरों में समान रूप से देवों के देव महादेव शिव Bhole Baba ने यह जहर खुद पी लेना स्वीकार किया।

महादेव शिव उस विष को हथेली पर रख कर उसे पी गये, देवी पार्वती ने विष को उनके कण्ठ से नीचे नहीं उतरने दिया। अतः विष के प्रभाव से शिव का कण्ठ नीला पड़ गया। इसीलिये महादेव को

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“नीलकण्ठ” भी कहा जाता है भोले के हथेली से थोड़ा सा विष पृथ्वी पर गिर गया, जिसे साँप, बिच्छू आदि विषैले जन्तुओं ने ग्रहण कर लिया।

भोला बाबा Bhole Baba के दर्शन करने के लिए लोग केदारनाथ जाते हैं रुद्रप्रयाग में कोटेश्वर महादेव में भी सावन के महीने में भोले को जल चढ़ाने जाते हैं|

हिन्दू धर्म और संस्कृति में सावन को सबसे पवित्र महीने का दर्जा हासिल है।

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महादेव शिव Bhole Baba के शरीर में विष का ताप कम करने के लिए देवों और असुरों ने दूर-दूर से गंगाजल लाकर उनका अभिषेक किया मां कामधेनु गाय ने नित्य निरंतर अपने थनों के द्वारा दूध से Bhole Baba का अभिषेक किया

तभी से शिवभक्तों के द्वारा सावन के महीने में उत्तराखण्ड गंगोत्री गौमुख धाम और नीलकंठ से पवित्र गंगा जल लेकर भारत के विभिन्न ज्योतिर्लिंगों और शिव मंदिरों में अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है।

शिव Bhole Baba के प्रति सम्मान इतना कि भक्त पवित्र गंगा जल को कांवर के साथ ‘बोल बम’ का जयघोष करते सैकड़ों मील की पैदल और कष्टपूर्ण यात्रा कर उनके मंदिर पहुंचते हैं।

आचार्य पंकज पुरोहित

आचार्य पंकज पुरोहित

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