सावन शिवरात्रि 2020,शुभ मुहूर्त में करें शिवजी का महा अभिषेक, होंगे भोले बाबा प्रसन्न

सावन शिवरात्रि

सावन का महीना चल रहा है और इस महीने पड़ने वाली शिवरात्रि को सावन शिवरात्रि (Lord Shiva)के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन की शिवरात्रि का बड़ा ही महत्व है

क्योंकि इसमें व्रत रखने वालों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। मनोवांछित फल पाने के लिए यह व्रत अति पावन है। साथ ही दांपत्य जीवन में प्रेम और सुख शांति बनाए रखने के लिए भी व्रत लाभकारी है।

https://livecultureofindia.com/

 

सावन शिवरात्रि का महत्व

सावन शिवरात्रि के व्रत का बहुत अधिक महत्व होता है। इस दिन व्रत रखने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। सावन शिवरात्रि के दिन व्रत रखने से क्रोध, ईष्र्या, अभिमान और लोभ से मुक्ति मिलती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन शिवरात्रि का व्रत कुंवारी कन्याओं के लिए श्रेष्ठ माना गया है। यह व्रत करने से उन्हें मनचाहा वर प्राप्त होता है। वहीं जिन कन्याओं के विवाह में समस्याएं आ रही हैं उन्हें सावन शिवरात्रि का व्रत करना चाहिए|

सावन शिवरात्रि पूजा विधि

सावन शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान करने के बाद घर के मंदिर में दीप जलाएं।
अगर आपके घर में शिवलिंग है तो शिवलिंग का गंगा जल से अभिषेक करें।
गंगा जल न होने पर आप साफ पानी से भी भोले बाबा का अभिषेक कर सकते हैं।
जिनके घर में शिवलिंग नहीं है वो भोले बाबा का ध्यान करें किसी भी रूप में
भगवान शिव (Lord Shiva)की आरती करें।

 https://livecultureofindia.com/सावन-शिवरात्रि-2020शुभ-मुहूर/ ‎
भगवान शिव के साथ माता पार्वती की आरती भी करें।
इस दिन अपनी इच्छानुसार भगवान शंकर को भोग लगाएं।
भगवान को सात्विक आहार का ही भोग लगाएं।
भोग में कुछ मीठा भी शामिल करें।
सावन शिवरात्रि व्रत में इन बातों का रखें ध्यान
ध्यान रहे शिवरात्रि के दिन काले वस्त्र धारण न करें और न ही खट्टी चीजों का सेवन करें। पूरा दिन व्रत कर शाम को भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा करने के साथ आरती गाए और दीप जलाने के बाद व्रत को खोलें। इस दिन घर में मांस मदीरा न लाएं।

इन्हें भी पढ़ें और वीडियो देखें

श्री केदारनाथ को जागृत महादेव क्यों कहा जाता है 

कोटेश्वर महादेव गुफा रुद्रप्रयाग

बाबा ततुंग नाथ यात्रा विडियो 

ये  5 पौराणिक तथ्य बताते हैं कि क्यों सावन है सबसे खास माह

1. मरकंडू ऋषि के पुत्र मार्कंडेय ने लंबी आयु के लिए सावन माह में ही घोर तप कर शिव (Lord Shiva)की कृपा प्राप्त की थी, जिससे मिली मंत्र शक्तियों के सामने मृत्यु के देवता यमराज भी नतमस्तक हो गए थे।

https://livecultureofindia.com/

2. भगवान शिव को सावन का महीना प्रिय होने का अन्य कारण यह भी है कि भगवान शिव सावन के महीने में पृथ्वी पर अवतरित होकर अपनी ससुराल गए थे और वहां उनका स्वागत अर्घ्य और जलाभिषेक से किया गया था,

माना जाता है कि प्रत्येक वर्ष सावन माह में भगवान शिव अपनी ससुराल आते हैं। भू-लोक वासियों के लिए शिव कृपा पाने का यह उत्तम समय होता है।

3. पौराणिक कथाओं में वर्णन है कि इसी  माह में समुद्र मंथन भी हुआ  था। समुद्र मंथन में जो  विष निकला, उसे भगवान शिव ने पी कर सृष्टि को बचाया था   विष पीने से महादेव का कंठ नीला हो गया। इसी लिए उनको ‘नीलकंठ  पभी खा जाता है|

शिव जी पर विष के प्रभाव को कम करने के लिए सब  देवी-देवताओं ने उस समय  पानी डाला था  इसलिए शिवलिंग पर जल चढ़ाने का अलग ही  महत्व है। यही वजह है कि श्रावण मास में भोले को जल चढ़ाने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

4. ‘शिवपुराण’ में में ये भी खा जाता  कि भगवान शिव खुद ही जल हैं। इसलिए जल से उनकी अभिषेक किया जाता है

5. शास्त्रों में वर्णित है कि सावन महीने में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसलिए ये समय भक्तों, साधु-संतों सभी के लिए अमूल्य होता है। यह चार महीनों में होने वाला एक वैदिक यज्ञ है|

जो एक प्रकार का पौराणिक व्रत है, जिसे ‘चौमासा’ भी कहा जाता है; तत्पश्चात सृष्टि के संचालन का उत्तरदायित्व भगवान शिव करते हैं।

https://livecultureofindia.com/

आप भगवान शिव से संबंधित हमारी डॉक्यूमेंट्री फिल्म देख सकते हैं


Leave a Reply