पहाड़ों की महिलाएं कैसे काम करती-himalayan women lifestyle

               पहाड़ों की महिलाएं

पहाडो का जीवन कठिन और बहुत परिश्रम से भरा होता है,पहाड़ों की महिलाएं अपने मजबूत कंधों पर हर ज़िम्मेदारी उठाती हैं। घबराने के बजाय डटकर मुकाबला करना ही इनकी कामयाबी की पहली सीढ़ी होती है।

 https://livecultureofindia.com/पहाड़ों-की-महिलाएं/

उत्तराखंड की महिलाओं की बात की जाए तो पहाड़ की महिलाओं ने वाकई समाज पर अपनी छाप छोड़ी है| यहाँ की महिलाओं ने हमेशा घर को स्वर्ग बनाते हुए। परिवार-बच्चों, और बड़े-बुजुर्गों को साथ लेकर चली है|

कृपया इन्हें भी पढ़ें और वीडियो भी देखें

पहाड़ों की महिलाएं खेत-खलियानों में जी-तोड़ मेहनत करके, हर काम में आगे बढ़कर उसे सफल बनाती हैं। कठिन परिश्रम से भरे जीवन मैं यहाँ की महिलाओं की हिम्मत सर्वोपरि है, जिसे करने में अच्छे खासे दिग्गजों के हौसले पस्त हो जाते हैं। हम यहां की इन महिलाओं को नमन करते हैं  यहाँ पर गांव के जंगल में पांच 6 महीने तक घास को बचाया जाता है और सर्दियों में उसे काटा जाता है इसे यहां की भाषा में चार या चारी कहते हैं|

 https://livecultureofindia.com/पहाड़ों-की-महिलाएं/

सुबह पूरे परिवार को नाश्ता कराने के बाद ये जंगल में चारा लेने के लिए जाएंगे, बुजुर्ग लोग घर पर बच्चों की देखभाल करते हैं|  सभी महिलाएं तय की गयी जगह पर इकट्ठे होती हैं| जिस पे चारा ले जायेंगे इसको यहां की भाषा में स्वालटा या चंगेरा कहा जाता है और घास काटने वाले दरांती को यहां पर दथली कहते हैं| सभी अपने स्वालटा और दथली को साथ लेकर पहुंच जाती है|

 https://livecultureofindia.com/पहाड़ों-की-महिलाएं/फिर पत्थर पर घिस के दथली को धार दी जाती है|  इनके चेहरे पर हर समय आप हंसी देखेंगे, जंगल का चौकीदार जिस की देखरेख में ये चारा काटेंगे, अब हम इन्ही से यहां के नियम के बारे में जान लेते हैं| इसके बाद सभी  अपनी अपनी घास वाली जगह पर भागते हुए खड़ी हो जाती है|
और जब चौकीदार काटने के लिए कहेगा तो तब ही ये घास काटना शुरू करगे| जंगल में आए और घर में बच्चों को खेलने के लिए खिलौने भी कुदरत ही देता है| धीरे-धीरे सब अपने अपने घर की ओर कई किलोमीटर पीठ पर लेके चल पड़ते हैं| वाकई यहां की महिलाओं के काम को हम सभी सलाम करते हैं|

we salute the work of women here.

पहाड़ों की महिलाएं कैसे काम करती विडियो देखें