26 2019 दिसंबर को लगने वाले सूर्य ग्रहण का समय, सूतक और किन राशियों पर क्या असर पड़ेगा | What will be the effect of the time of solar eclipse on December 26, Sutak and time

सूर्य ग्रहण  solar eclipse 

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26 दिसंबर माह में लगने वाला सूर्य ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण नही होगा बल्कि आंशिक सूर्यग्रहण होगा। जिसें खंडग्रास सूर्य ग्रहण भी कहा जाता है।
आचार्य पंकज पुरोहित जी का कहना है कि वर्ष 1962 में बहुत बड़ा सूर्यग्रहण हुआ था, जिसमें सात ग्रह एक साथ थे। इस बार छह ग्रह एक साथ हैं केवल एक ग्रह की कमी है।  26 दिसंबर को लगभग तीन घंटे सूर्य ग्रहण होगा।
सूर्य ग्रहण solar eclipse के मुकाबले बहुत ज्यादा तीव्र होगा क्योंकि इस सूर्य ग्रहण के समय धनु राशि में एक साथ छह ग्रह (सूर्य, चन्द्रमा, शनि, बुध, बृहस्पति, केतु) का योग बनेगा जिससे इस सूर्यग्रहण का प्रभाव बहुत ज्यादा और लंबे समय तक रहने   वाला होगा। आचार्य जी ने बताया कि 25 दिसंबर सायं 8 बजकर 15 मिनट से सूतक लग जाएगा। जिसके तहत मंदिर के कपाट और पूजा पाठ का कोई भी शुभ कार्य नहीं होगा। 26 दिसंबर को सूर्यग्रहण होगा।  काले उड़द, मूंग की दाल आटा, आदि का दान करें। 
सूर्य ग्रहण समय solar eclipse time
सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर 2019 प्रारंभ समय – सुबह 8 बजकर 17 मिनट 

सूर्य ग्रहण परमग्रास – सुबह 9 बजकर 31 मिनट (26 दिसंबर 2019)

सूर्य ग्रहण  26 दिसंबर 2019 समाप्ति समय – सुबह 10 बजकर 57 मिनट 
सूतक काल प्रारंभ- शाम 8 बजकर 15 मिनट से (25 दिसंबर 2019)

सूतक काल समाप्त – अगले दिन सुबह 10 बजकर 57 मिनट तक (26 दिसंबर 2019)
किस राशि और नक्षत्र पर लगेगा सूर्य ग्रहण 
26 दिसंबर को सूर्य ग्रहण,solar eclipse इन तीन राशियों को धन लाभ देगा। इससे पूर्व 25 दिसंबर को चंद्रमा, धनु राशि में प्रवेश करेगा। इस ग्रहीय बदलाव का प्रभाव राशियों के अनुसार जातकों पर पड़ेगा प्रभाव ।
आचार्य जी के अनुसार सूतक काल में शुभ कार्य वर्जित रहेंगे। ग्रहण में आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ, सूर्याष्टक स्तोत्र पाठ,  गंगा स्नान, दान करना फलदायी रहेगा।
इन सभी 12 राशियों पर ग्रहण का प्रभाव पड़ेगा।
मेष : चिंता, संतान को कष्ट
उपाय – लाल मसूर की दाल का दान करें
वृषभ : शत्रुभय, साधारण लाभ।
उपाय-सफेद वस्तुओं का दान करें
मिथुन : स्त्री व पति को कष्ट।
उपाय- मूंग की दाल का दान करें हरी वस्तुओं का दान करें
कर्क : रोग की चिंता।
उपाय- दूध और दही का दान करें
सिंह : खर्च अधिक, कार्य में देरी।
उपाय-ताम्बे गढ़वी में गेहूं भरकर लाल कपड़े में बांध कर दान करें
कन्या: कार्य सिद्धि, सफलता।
उपाय– हरी वस्तुओं का दान करें, गया को चारा डालें
 तुला : आर्थिक विकास, धन लाभ। उपाय- चावल, चीनी, सफेद वस्तुओं का दान करें
वृश्चिक : कार्य में अवरोध, धन हानि। उपाय हनुमान चालीसा का पाठ करें लाल वस्तुओं का दान करें
धनु : दुर्घटना, चोट की चिंता।
उपाय- चन्ना गुड़ का दान करें
मकर : धन का अपव्यय, कार्य में बाधा। उपाय-काली उड़द की दाल और काली वस्तुओं का दान करें
कुम्भ : लाभ, उन्नति के अवसर।
उपाय-कोयला और श्रीफल का दान करें
मीन : रोग, कष्ट, भय की प्राप्ति।
उपाय- पीले कपड़े में चन्ने की दाल बांध कर दान करें और पीली वस्तुओं का दान करें

सूर्य ग्रहण की धार्मिक मान्यताएं Religious beliefs of solar eclipse
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्यग्रहण के दिन सूर्य भगवान को राहु केतु अपना ग्रास बना लेते हैं। जिसके कारण पृथ्वीं पर अंधकार छा जाता ही। सूर्यदेव को इस पीड़ा से निकालने के लिए पृथ्वीं पर जप, तप और हवन किया जाता है। क्योंकि जिस समय राहु केतु सूर्यदेव को अपना ग्रास बनाते हैं। उस समय पृथ्वीं पर तो अंधेरा छा ही जाता है। लेकिन उस समय प्राकृतिक आपदाएं, सत्ता परिवर्तन, राजा और प्रजा के बीच में तनाव भी देखने को मिलता है। इसलिए सूर्य ग्रहण को अशुभ माना जाता है।
सूर्य ग्रहण की वैज्ञानिक मान्यताएं Legend of solar eclipse
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सूर्य ग्रहण मात्र एक घटना है। जब चंद्रमा पृथ्वीं और सूर्य के बीच में आ जाता है। उस समय सूर्य ग्रहण होता है।

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जो केवल एक मात्र साधारण सी घटना है। जिसका आमजन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। लेकिन यह एक दुर्लभ नजारा होता है। जिसे नंगी आखों से नहीं देखना चाहिए। बल्कि किसी न किसी उपकरण के माध्यम से ही देखना चाहिए। जिससे आंखों पर इसका कोई बुरा असर न पड़े। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से एक साल में दो या तीन सूर्यग्रहण पड़ते हैं। जिसमें पूर्ण सूर्यग्रहण और आंशिक सूर्य ग्रहण भी होता है।
सूर्य ग्रहण की कथा Legend of solar eclipse
विष्णु पुराण के अनुसार जिस समय समुद्र मंथन हुआ था। उस समय देवता और असुरों के बीच अमृत को पाने के लिए झगड़ा हुआ था। इस समस्या को सुलझाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया था। जिस दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया था। उस दिन मोहिनी एकादशी थी। जिसके बाद भगवान विष्णु ने देवाताओं और असुरों को अलग- अलग पंक्तियों में बैठा दिया। लेकिन उनमें से एक असुर देवता का रूप धारण करके देवाताओं की पंक्ति में बैठ गया। और अमृत पान कर लिया। देवों की पंक्ति में बैठे सूर्य और चंद्र ने उस असुर को पहचान लिया और भगवान विष्णु को इसके बारे में बता दिया।
जिसके बाद भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से उस असुर का सिर धड़ से अलग कर दिया। लेकिन अमृत पान करने के कारण उसकी मृत्यु होना असंभव था। जिसके कारण उस असुर का सिर और धड़ तो अलग हो गया। लेकिन वह मरा नहीं। शास्त्रों के अनुसार सिर वाले भाग को राहु और धड़ वाले भाग को केतु कहा जाता है। इसी वजह से सूर्य और चंद्र को राहु केतु अपना दुश्मन मानते हैं और जिसके कारण वह सूर्य को अपना ग्रास बना लेते हैं। इसलिए हर साल सूर्य ग्रहण अवश्य होता है।
सूर्य ग्रहण के सूतक काल में क्या न करें 
सूर्य ग्रहण में गर्भवती महिलाओं समेत सभी को सावधानी रखना अति आवश्यक है|
1. सूर्य ग्रहण के सूतक काल में किसी भी शुभ काम की शुरुआत न करें। क्योंकि इस काल में किया गया कोई भी काम सफल नहीं होता।
2. सूर्य ग्रहण के सूतक काल में न तो खाना बनाएं और न ही खाएं।
3.सूर्य ग्रहण के सूतक काल में पूजा करना निषेध माना जाता है। इसलिए किसी भी मूर्ति को इस समय में स्पर्श न करें। वैसे इस समय में मंत्र जाप किया जा सकता है।
4. सूर्य ग्रहण के सूतक काल में शारीरीक संबंध न बनाएं।
5. सूर्य ग्रहण के सूतक काल में किसी सूनसान जगह या शमशान के पास न जाएं।

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आचार्य पंकज पुरोहित